डी.पी. विप्र महाविद्यालय में एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित
बिलासपुर:-डी.पी. विप्र महाविद्यालय में आज दिनांक 27/01/2026 को केंद्रीय हिंदी निदेशालय शिक्षा मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग) भारत सरकार, नई दिल्ली, पं. सुुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय बिलासपुर (छ.ग.) एवं डी.पी. विप्र महाविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.) के संयुक्त तत्वावधान में मूर्धन्य साहित्यका पं. रामनारायण शुक्ल की स्मृति में, हिंदी विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यानमाला एवं साहित्कि यात्रा विषय- हिंदी और भारतीय चिति पर आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. किरण झा, सहायक निदेशक केंद्रीय निदेशालय नई दिल्ली ने हिंदी की दशा और दिशा पर विस्तार से बताते हुए कहा कि आज हिंदी भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के 150 देशों में बोली और समझी जाती है। हिंदी हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। आज विश्व में जो गिरमिटिया मजदूर थे उन्होंने अपनी संस्कृति को रामचरितमानस और हनुमान चालिसा आदि ग्रंथों को लाल कपड़ों में लपेटकर अपने साथ ले गये और आज कहीं न कहीं वे हमारे लिए सम्मानीय है। कारण कि उनके द्वारा ही आज हिंदी विश्व में बोली जा रही है। विशिष्ट अतिथि डॉ. हीरालाल शर्मा, निदेशक मानविकी विभाग, पं. सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय ने हिंदी को भारतीयों की आत्मा कहा और चिति को जगत की नित्यता का द्योतक माना चिति का स्वरूप को सत्य और चिर सुंदर माना है। डॉ. सुनील कुमार, सहा. केंद्रीय हिंदी निदेशालय ने साहित्य में आदि काल से लेकर आधुनिक काल तक के भावबोध को परिलक्षित करते हुए बताया कि हिंदी के विकास में उत्तर से लेकर दक्षिण तक के साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान है। महाविद्यालय के उपप्राचार्य डॉ. एम.एस. तम्बोली ने उद्बोधन में कहा कि चिति वैदिक शब्द है, जिसका अर्थ आत्मा से है और यह चिति हमारे साहित्य में अपने मूल चेतना को लेकर चली है।
कार्यक्रम की संचालन हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरुचि मिश्रा एवं आभार प्रदर्शन डॉ. आभा तिवारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. संजय कुमार तिवारी, डॉ.एम.एल. जायसवाल, डॉ. विवेक अम्बलकर, डॉ. ए.श्रीराम, डॉ. सुषमा शर्मा, डॉ.निधीष चौबे, श्री शैलेन्द्र कुमार तिवारी, डॉ. खगेन्द्र सोनी, डॉ. शिखा पहारे, श्रीमती तोषिमा मिश्रा, श्रीमती श्रीति सोमवंशी, डॉ. ऋचा हाण्डा, डॉ. किरण दुबे, डॉ. मेघा दाबड़कर, श्री यूपेश कुमार, श्री रूपेन्द्र शर्मा, डॉ. कांची वाजपेयी, डॉ. ज्योति तिवारी, श्री लोकेश कुमार वर्मा, श्री सुचित दुबे, श्री सगराम चंद्रवंशी, श्री तोरण यादव एवं महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं ऐन. एस.एस./ऐन.सी.सी. के छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

प्राचार्य
डी.पी.विप्र महाविद्यालय
बिलासपुर (छ.ग.)

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