एनएसयूआई के छात्र प्रतिनिधि मंडल ने महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी एवं महर्षि शिक्षा संस्थान, मंगला बिलासपुर के नियमविरुद्ध संचालन, संस्थान में व्याप्त अनियमितताओं, फर्जीवाड़ा एवं भ्रष्टाचार के संबंध में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन एवं कुलसचिव डॉ. विजय गारुडिक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्यवाही किए जाने की मांग की।

ज्ञापन में जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि विभिन्न नियामक संस्थाओं एवं शासकीय विभागों द्वारा गठित जांच समितियों के प्रतिवेदनों में महर्षि यूनिवर्सिटी एवं महर्षि शिक्षा संस्थान द्वारा नियमों के विपरीत डी.एल.एड. पाठ्यक्रम का संचालन, एक ही भूमि एवं भवन में दो संस्थानों के नाम से पाठ्यक्रम संचालित करना, आदेशों की अवहेलना करना तथा प्रशासन को भ्रामक जानकारी देना जैसे गंभीर मामलों की पुष्टि हुई है, इसके बावजूद अब तक संबंधित संस्थान के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि ऐसी भ्रष्ट शैक्षणिक संस्था, जिसके विरुद्ध छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग (CGPURC) द्वारा निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम 2005 की धारा 41(1) के तहत विश्वविद्यालय को बंद करने अथवा प्रशासक नियुक्त करने की अनुशंसा की जा चुकी हो, जहां के विद्यार्थियों को पिछले तीन वर्षों से छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं हो रही हो, जिसके डी.एल.एड. पाठ्यक्रम को बंद करने का आदेश जारी किया जा चुका हो, तथा डीईओ द्वारा डी.एल.एड. अभ्यर्थियों के इंटर्नशिप (शाला अनुभव) कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई हो, ऐसे संस्थान के विरुद्ध आज तक कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं होना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले सत्र के डी.एल.एड. परिणाम में दो अलग-अलग संस्थानों के प्राचार्य के नाम से एक ही व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का मामला सामने आया है तथा यूजीसी द्वारा भी उक्त विश्वविद्यालय को डिफॉल्टर घोषित किया जा चुका है।

जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार एवं शासन-प्रशासन से प्रश्न किया कि ऐसी भ्रष्ट शैक्षणिक संस्था को आखिर किस विभाग अथवा किस नेता-मंत्री का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण बिलासपुर में शिक्षा के नाम पर खुलेआम व्यापार किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि जब उनके द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की जांच के लिए विभिन्न नियामक संस्थाओं एवं पुलिस विभाग में शिकायत की गई, तब संस्थान प्रबंधन द्वारा उनके विरुद्ध न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया गया, जिस पर वे आज भी माननीय उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में न्यायिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके बावजूद संस्थान के कुलसचिव द्वारा न्यायालयीन प्रकरण के संबंध में कलेक्टर के समक्ष झूठी एवं भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करते हुए प्रकरण के समाप्त/खारिज होने का उल्लेख किया गया, जो माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के समान है।

एनएसयूआई ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि उक्त प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के कुलसचिव डॉ. विजय गारुडिक एवं विश्वविद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए। साथ ही नियमविरुद्ध संचालित डी.एल.एड. पाठ्यक्रम सहित अन्य गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच कर आवश्यकतानुसार संस्थान के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

एनएसयूआई ने यह भी मांग की कि वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके शैक्षणिक हितों की सुरक्षा हेतु उचित व्यवस्था की जाए तथा आगामी शैक्षणिक सत्र में किसी भी प्रकार के नए प्रवेश पर पूर्णतः रोक लगाने की कार्यवाही की जाए।
कलेक्टर बिलासपुर ने इस प्रकरण में सचिव, उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन को आवश्यक कार्यवाही हेतु पत्र प्रेषित करने तथा पुलिस अधीक्षक बिलासपुर द्वारा संचालक उच्च शिक्षा विभाग, एससीईआरटी एवं एनसीटीई को पत्राचार कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने का आश्वासन दिया।

जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने कहा कि यदि 10 दिनों के भीतर इस प्रकरण में कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं की जाती है, तो एनएसयूआई द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी/महर्षि शिक्षा संस्थान परिसर में धरना-प्रदर्शन कर छात्रहित में कार्यवाही की मांग की जाएगी।

इस दौरान एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के साथ प्रदेश सचिव लोकेश नायक, बेलतरा विधानसभा अध्यक्ष विक्की यादव, जिला उपाध्यक्ष सुमित शुक्ला, जिला महासचिव शिवांश पाठक, जिला महासचिव प्रवीण साहू, जिला महासचिव सुबोध नायक, विपिन साहू,पुष्कर पाल, उमेश पटेल आदि एनएसयूआई के पदाधिकारी एवं छात्र कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में

एनएसयूआई के छात्र प्रतिनिधि मंडल ने महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी एवं महर्षि शिक्षा संस्थान, मंगला बिलासपुर के नियमविरुद्ध संचालन, संस्थान में व्याप्त अनियमितताओं, फर्जीवाड़ा एवं भ्रष्टाचार के संबंध में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन एवं कुलसचिव डॉ. विजय गारुडिक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्यवाही किए जाने की मांग की।

ज्ञापन में जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि विभिन्न नियामक संस्थाओं एवं शासकीय विभागों द्वारा गठित जांच समितियों के प्रतिवेदनों में महर्षि यूनिवर्सिटी एवं महर्षि शिक्षा संस्थान द्वारा नियमों के विपरीत डी.एल.एड. पाठ्यक्रम का संचालन, एक ही भूमि एवं भवन में दो संस्थानों के नाम से पाठ्यक्रम संचालित करना, आदेशों की अवहेलना करना तथा प्रशासन को भ्रामक जानकारी देना जैसे गंभीर मामलों की पुष्टि हुई है, इसके बावजूद अब तक संबंधित संस्थान के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि ऐसी भ्रष्ट शैक्षणिक संस्था, जिसके विरुद्ध छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग (CGPURC) द्वारा निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम 2005 की धारा 41(1) के तहत विश्वविद्यालय को बंद करने अथवा प्रशासक नियुक्त करने की अनुशंसा की जा चुकी हो, जहां के विद्यार्थियों को पिछले तीन वर्षों से छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं हो रही हो, जिसके डी.एल.एड. पाठ्यक्रम को बंद करने का आदेश जारी किया जा चुका हो, तथा डीईओ द्वारा डी.एल.एड. अभ्यर्थियों के इंटर्नशिप (शाला अनुभव) कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई हो, ऐसे संस्थान के विरुद्ध आज तक कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं होना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले सत्र के डी.एल.एड. परिणाम में दो अलग-अलग संस्थानों के प्राचार्य के नाम से एक ही व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का मामला सामने आया है तथा यूजीसी द्वारा भी उक्त विश्वविद्यालय को डिफॉल्टर घोषित किया जा चुका है।

जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार एवं शासन-प्रशासन से प्रश्न किया कि ऐसी भ्रष्ट शैक्षणिक संस्था को आखिर किस विभाग अथवा किस नेता-मंत्री का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण बिलासपुर में शिक्षा के नाम पर खुलेआम व्यापार किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि जब उनके द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की जांच के लिए विभिन्न नियामक संस्थाओं एवं पुलिस विभाग में शिकायत की गई, तब संस्थान प्रबंधन द्वारा उनके विरुद्ध न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया गया, जिस पर वे आज भी माननीय उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में न्यायिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके बावजूद संस्थान के कुलसचिव द्वारा न्यायालयीन प्रकरण के संबंध में कलेक्टर के समक्ष झूठी एवं भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करते हुए प्रकरण के समाप्त/खारिज होने का उल्लेख किया गया, जो माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के समान है।

एनएसयूआई ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि उक्त प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के कुलसचिव डॉ. विजय गारुडिक एवं विश्वविद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए। साथ ही नियमविरुद्ध संचालित डी.एल.एड. पाठ्यक्रम सहित अन्य गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच कर आवश्यकतानुसार संस्थान के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

एनएसयूआई ने यह भी मांग की कि वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके शैक्षणिक हितों की सुरक्षा हेतु उचित व्यवस्था की जाए तथा आगामी शैक्षणिक सत्र में किसी भी प्रकार के नए प्रवेश पर पूर्णतः रोक लगाने की कार्यवाही की जाए।
कलेक्टर बिलासपुर ने इस प्रकरण में सचिव, उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन को आवश्यक कार्यवाही हेतु पत्र प्रेषित करने तथा पुलिस अधीक्षक बिलासपुर द्वारा संचालक उच्च शिक्षा विभाग, एससीईआरटी एवं एनसीटीई को पत्राचार कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने का आश्वासन दिया।

जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने कहा कि यदि 10 दिनों के भीतर इस प्रकरण में कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं की जाती है, तो एनएसयूआई द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी/महर्षि शिक्षा संस्थान परिसर में धरना-प्रदर्शन कर छात्रहित में कार्यवाही की मांग की जाएगी।

इस दौरान एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के साथ प्रदेश सचिव लोकेश नायक, बेलतरा विधानसभा अध्यक्ष विक्की यादव, जिला उपाध्यक्ष सुमित शुक्ला, जिला महासचिव शिवांश पाठक, जिला महासचिव प्रवीण साहू, जिला महासचिव सुबोध नायक, विपिन साहू,पुष्कर पाल, उमेश पटेल आदि एनएसयूआई के पदाधिकारी एवं छात्र कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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