बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के दावों की खुली पोल

कोटा ब्लॉक के स्कूलों में जर्जर शौचालय, बेटियों की पढ़ाई पर बड़ा सवाल

बिलासपुर के कोटा ब्लॉक से जो तस्वीर सामने आई है, उसने सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जर्जर शौचालय, बदहाल स्कूल और परेशान छात्राएं… अब इस मुद्दे को लेकर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिश्वास ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर सीधा हमला बोला है।

एक तरफ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया जैसे अभियान चला रहे हैं, लेकिन बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के कई सरकारी स्कूल इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। यहां छात्राएं जर्जर और बदहाल स्कूलों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिश्वास ने खास तौर पर कोटा ब्लॉक के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला परसापानी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शौचालय की हालत कल्पना से भी बदतर है। स्कूल में पढ़ने वाली बेटियों और शिक्षिकाओं को टूटे-फूटे और खंडहर जैसे शौचालयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह शौचालय पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिसके कारण छात्राओं को असुरक्षित और असुविधाजनक हालात में पढ़ाई करनी पड़ रही है। यही हाल कोटा ब्लॉक के कई अन्य दूरंचल सरकारी स्कूलों में भी देखने को मिल रहा है।

नीलेश बिश्वास,,एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़

नीलेश बिश्वास ने कहा कि यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि वर्षों से बनी हुई है। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में बैठकर कागजी काम कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत बेहद खराब है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए योजनाएं चला रही है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन योजनाओं का लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है। खासकर वनांचल और दूरस्थ इलाकों के स्कूलों की हालत सबसे ज्यादा खराब है।

नीलेश बिश्वास,,एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़

एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द स्कूलों की हालत नहीं सुधरी तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि अधिकारी खुद स्कूलों का दौरा कर हकीकत देखें और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि बेटियों को सम्मानजनक माहौल में पढ़ाई का अधिकार मिल सके।

राकेश खरे

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