गुरु घासीदास बाबा का “मनखे-मनखे एक समान” संदेश विश्व शांति का आधार : श्याम गुप्ता

हिंसा और अलगाव की राजनीति के बीच मानवता का प्रकाशस्तंभ है गिरोधपुरी धाम

छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर अवतरित महान संत गुरु घासीदास बाबा का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश न केवल राजकीय या राष्ट्रीय स्तर तक सीमित है, बल्कि यह संपूर्ण विश्व मानवता के लिए एक अमूल्य मार्गदर्शन है। यह विचार हिंसा, भेदभाव और घृणा को त्यागकर आपसी प्रेम, समानता और भाईचारे की राह दिखाता है। उक्त विचार प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश संरक्षक एवं नागरिक सुरक्षा सेवा संगठन के संस्थापक, अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट खिलाड़ी व अंतरराष्ट्रीय कोच रेंशी श्याम गुप्ता ने गिरोधपुरी धाम में गुरु घासीदास बाबा को नमन करते हुए व्यक्त किए।

श्याम गुप्ता ने कहा कि भारत की महान परंपरा में जन्मे संत, महापुरुष और साधक किसी एक धर्म, पंथ या संप्रदाय की सीमा में नहीं बंधे होते। वे ईश्वर के दूत होते हैं, जिनका अवतरण केवल मानव कल्याण और समाज को सही दिशा देने के लिए होता है। गुरु घासीदास बाबा का जीवन और उनका संदेश इस सत्य का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने समाज को यह सिखाया कि हर मानव समान है और किसी भी प्रकार का ऊँच-नीच या भेदभाव मानवता के विरुद्ध है।

उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ती अलगाववादी और गंदी राजनीति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज को गुरु घासीदास बाबा के विचारों को आत्मसात करने की सबसे अधिक आवश्यकता है। “मनखे-मनखे एक समान” का सिद्धांत केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक समरसता और शांति स्थापित करने की क्षमता रखता है।

गिरोधपुरी धाम को नमन करते हुए श्याम गुप्ता ने आह्वान किया कि सर्व भारतीय समाज गुरु घासीदास बाबा के संदेश को अपने जीवन में उतारे। यही मार्ग मानवता को हिंसा, नफरत और विभाजन से निकालकर प्रेम, सद्भाव और विश्व बंधुत्व की ओर ले जा सकता है।

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