
“शिक्षा संस्कार के बिना अधूरी, संस्कार ही जीवन की असली नींव – श्याम गुप्ता”
रायपुर / प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव सामाजिक कार्यकर्ता श्याम गुप्ता ने कहा कि शिक्षा यदि संस्कार के बिना हो तो वह अधूरी मानी जाती है। हमारे पूर्वज भले ही अधिक शिक्षित नहीं थे, लेकिन उनके अनुभव, संस्कार और जीवन मूल्यों के कारण वे अपने बच्चों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं तक की परवरिश बिना किसी मानसिक तनाव के कर लेते थे। आज आधुनिक और शिक्षित समाज में भी मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद और रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि आज की स्थिति यह है कि छोटे, मध्यम और उच्च वर्ग यानी लो, मिडिल और हाई सोसायटी सभी वर्गों के लोग मानसिक तनाव से पीड़ित हैं। आज के समय में होने वाली शादियों में से लगभग आधी शादियां टूट रही हैं, जिसका मुख्य कारण संस्कार विहीन शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली है।
श्याम गुप्ता ने कहा कि बाबा साहब एक महान समाज सुधारक थे और संविधान निर्माण में केवल एक समाज नहीं बल्कि सर्व समाज के सैकड़ों विद्वानों और महापुरुषों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने देशहित में मिलकर एक बेहतरीन संविधान बनाने का प्रयास किया। सभी महापुरुषों के योगदान को सम्मान देना चाहिए।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भेदभाव, पाखंड, वर्ग और व्यवस्था हर युग में रही है और आगे भी रहेगी, जैसे किसी भी विभाग में कलेक्टर, बाबू, चपरासी और गार्ड अलग-अलग जिम्मेदारियों में होते हैं, उसी तरह समाज में भी विभिन्न वर्ग और जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन गंदी राजनीति करने वाले स्वार्थी लोग समाज में खाई पैदा करने का काम करते रहते हैं, जिससे समाज को सावधान रहने की जरूरत है।
अंत में श्याम गुप्ता ने कहा कि समाज को जोड़ने का काम करें, तोड़ने का नहीं, शिक्षा के साथ संस्कार को अपनाएं तभी समाज और देश मजबूत बनेगा।




