

“स्थानीय संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति अधूरी” – श्याम कुमार गुप्ता
“छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दबाने वालों पर श्याम गुप्ता का तीखा बयान”
रायगढ़। भारतीय संस्कृति की जड़ें स्थानीय परंपराओं और क्षेत्रीय संस्कृतियों में निहित हैं। जब तक देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की लोक परंपराएं, भाषा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित नहीं रहेंगी, तब तक भारतीय संस्कृति का वास्तविक स्वरूप भी सुरक्षित नहीं रह सकता।
इसी विषय पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति को मजबूत बनाए रखने के लिए स्थानीय संस्कृतियों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश अपनी विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है।
श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि जो लोग स्थानीय संस्कृतियों को आगे बढ़ने से रोकने या उन्हें कमजोर करने का प्रयास करते हैं, वे वास्तव में भारतीय संस्कृति की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं। उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोक परंपराएं, त्योहार और सामाजिक मूल्य देश की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध करते हैं और इन्हें बढ़ावा देना हम सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं, भाषा और संस्कृति से जोड़ना जरूरी है, तभी भारतीय संस्कृति की असली पहचान और गौरव सुरक्षित रह पाएगा।


