बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से इंसानियत और भाईचारे की एक प्रेरक मिसाल सामने आई है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ मुस्लिम विकास संघ द्वारा 15वां रोजा के अवसर पर बिलासपुर जेल में बंद बंदियों के बीच विशेष रोजा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान संघ के पदाधिकारी जेल पहुंचे और बंदियों के साथ बैठकर रोजा इफ्तार किया। इस अवसर पर उन्होंने बंदियों को जीवन में अच्छाई, सब्र और नेक रास्ते पर चलने का संदेश दिया। समाजसेवियों ने कहा कि जो बंदी यहां अपनी सजा पूरी कर रहे हैं, वे जेल से बाहर निकलकर एक जिम्मेदार और सकारात्मक सोच वाले नागरिक के रूप में समाज में नई शुरुआत करें।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि यह पहल पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार की जा रही है। हर साल रमज़ान और 15वां रोजा के मौके पर जेल में बंद भाइयों के बीच पहुंचकर उनके साथ रोजा खोला जाता है और इंसानियत, भाईचारे व सुधार का संदेश दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि जेल में कई बंदी स्वयं भी रोजा रखते हैं। ऐसे में उनका हौसला बढ़ाने और उनका साथ देने के उद्देश्य से संघ के सदस्य उनके बीच पहुंचते हैं और सामूहिक रूप से इफ्तार करते हैं।

गौरतलब है कि 15वां रोजा, जिसे कजा रोजा भी कहा जाता है, वह रोजा होता है जिसे किसी मजबूरी—जैसे बीमारी, सफर या अन्य कारणों से रमज़ान में न रख पाने की स्थिति में बाद में अल्लाह की रज़ा के लिए रखा जाता है। यह रोजा इंसान को सब्र, अनुशासन और दूसरों के प्रति हमदर्दी का संदेश देता है।
इस प्रकार के आयोजन न केवल बंदियों के मनोबल को बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और मानवता की भावना को भी मजबूत करते हैं।

रिपोर्ट…….राकेश मिश्रा
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