
बीजापुर। बस्तर अंचल में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। जिले में संचालित “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत सुरक्षा बलों और प्रशासन के सतत प्रयासों से कुल 51 माओवादी आज समाज की मुख्यधारा में लौट आए हैं। इनमें ₹66 लाख के इनामी नक्सली भी शामिल हैं, जो लंबे समय से पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए थे।
इन माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास नीति पर भरोसा जताया है। अभियान का उद्देश्य माओवाद से प्रभावित युवाओं को हिंसा के रास्ते से हटाकर विकास और शांति की दिशा में अग्रसर करना है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में विभिन्न एरिया कमेटियों के सक्रिय सदस्य शामिल हैं, जिन्होंने अब समाज के पुनर्निर्माण में योगदान देने की इच्छा जताई है।

इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार, विशेष रूप से मंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर क्षेत्र को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
“पूना मारगेम” अभियान के परिणामस्वरूप बस्तर में तेजी से शांति और विकास का वातावरण स्थापित हो रहा है। आत्मसमर्पण करने वालों को सरकार की नीति के तहत आर्थिक सहायता, पुनर्वास और स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिससे वे नए जीवन की शुरुआत कर सकें।
