*एसपी जीपीएम ने केस स्टडी और प्रेजेंटेशन के जरिए बताया साइबर अपराधियों का फेक पुलिस कॉल स्कैम वाला ठगी का तरीका और दिए सेफ्टी टिप्स*

*फेक पुलिस कॉलर के झांसे में आकर न करें कोई वित्तीय लेन देन वरना हो जायेंगे ठगी के शिकार*

जीपीएम जिले के हर थाने में लगातार ऑनलाइन साइबर प्रहरी और चौपाल लगाकर साइबर अपराधों के संबंध में आमजन को जागरूक करने मुहिम चलाई जा रही है। प्रत्येक माह साइबर की पाठशाला का आयोजन कर जीपीएम पुलिस के फेसबुक पेज पर लाइव आकर एक्सपर्ट्स द्वारा लोगों को जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

जिस क्रम में आज जीपीएम एसपी आईपीएस श्रीमती भावना गुप्ता द्वारा जीपीएम पुलिस के फेसबुक पेज पर लाइव आकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स जिनके जरिए अपराधियों द्वारा पीड़ित और उसके परिजनों की जानकारी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जुटाई जाती है जिसका इस्तमाल करते हुए अपराधी किसी व्यक्ति को फर्जी पुलिस बनकर जालसाजी करते हुए फोन करके उसके परिजन के किसी मामले में गिरफ्तार होने का झांसा देता है। अक्सर अपराधी घर से दूर रहने वाले बेटे, बेटी या किसी युवा परिजन के फंसने की कहानी तैयार करते हैं। अपराधी सोशल मीडिया के ज़रिए इतनी जानकारी जुटा कर कॉल करते हैं कि पीड़ित समझ नही पाता और यह मान लेता है कि उसके परिजन पुलिस केस में फंस गए हैं। साथ ही अपराधी पीड़ित को सोचने समझने के लिए मौका नहीं देता और ऐसी परिस्थिति बताता है कि यदि तत्काल पैसे नहीं भेजे गए तो उसके परिजन को जेल जाने से नहीं बचाया जा सकता । पीड़ित उनके जाल में फंसकर मोटी रकम फोन पे या ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए दे देता है। विगत दिनों इसी तरीके से हुई ठगी के मामले में थाना मरवाही में दर्ज प्रकरण की केस स्टडी जिसमे पीड़ित के बेटे को बलात्कार केस में फंसे होने का भय पैदा कर और फिर बचाने के बहाने दो लाख की ठगी की घटना को भी प्रेजेंटेशन के जरिए बताया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि पीड़ित द्वारा ठगी की घटना की सूचना अविलंब देने के कारण लगभग एक लाख की राशि तत्काल होल्ड करा दी गई।

एसपी श्रीमती भावना गुप्ता ने बताया कि इस तरह के कॉल्स आने पर सबसे पहले अपने उस परिजन से संपर्क करें जिसके बारे में अपराधी द्वारा गिरफ्तार होना बताया जा रहा है साथ ही पुष्टि के लिए ऐसे कॉलर से उसका नाम पदनाम और पदस्थापना पूछ लेने से और उसे वेरिफाई करने से भी अपराधी का झूठ पकड़ा जाता है। एसपी ने बताया कि कभी भी शासन द्वारा निर्धारित किए गए सरकारी नंबर के अलावा किसी अन्य नंबर से कोई अपराधी शासकीय सेवक बनकर बात करे तो उसकी पहले अच्छे से पड़ताल कर लें साथ ही बहकावे में आकर या डरकर तुरंत कोई वित्तीय लेन देन नही करें वरना धोखाधड़ी का शिकार बन सकते हैं। एसपी श्रीमती भावना गुप्ता ने साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग हेतु साइबर पोर्टल https://cybercrime.gov.in और *डायल 1930* कॉलिंग फैसिलिटी की जानकारी भी दी ।

साइबर की पाठशाला के आयोजन में जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल और डीएसपी निकिता तिवारी, साइबर सेल के एएसआई मनोज हनोतिया और आरक्षक रामचंद्र यादव की सक्रिय भूमिका रही।

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