
बेशर्म है ये सरकार,
डबल इंजन की सरकार में अपनी नौकरी गवाँ चुके शिक्षकों का ये संघर्ष दुःखद है।
राजधानी में कड़कड़ाती ठंड में बीएडधारी शिक्षक सड़कों पर लेटकर अपनी नौकरी के लिए गुहार लगा रहे हैं।
ऐसा सुशासन अस्वीकार्य है।
छत्तीसगढ़ में 3,000 बीएड धारी सहायक शिक्षकों की सेवा समाप्ति का फैसला न केवल हृदय विदारक है, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था और हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है।
यह अनैतिक फैसला इन शिक्षित युवाओं को बेरोज़गार करने के साथ-साथ प्रदेश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
इस कड़ाके की ठंड में, सड़कों पर बैठी बीएड पास लड़कियों का दंडवत विरोध पर सरकार का मूकदर्शन भाजपा की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
रोज़गार बढ़ाने की जगह छीनना – यही आज प्रदेश और देश की दुर्दशा का कारण है।
सरकार को तुरंत इस निर्णय को वापस लेना चाहिए और शिक्षकों को उनका हक देना चाहिए, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और इन युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।
