
पुलिस ग्राउण्ड में आयोजित नये दृष्टिकोण वाले शिविर के आज चौथे दिन की सुबह संध्या में सन टू ह्यूमन फाउण्डेशन के संस्थापक परम आलय ने शिविर में आये हर वर्ग के हजारों लोगों को सहज, सरल सूत्रों से ,चर्चा प्रश्न उत्तरों के साथ जीवन को समृद्ध करने के प्रयोग कराये
इस शिविर का प्रमुख टेग प्रवचन नहीं प्रयोग में बताया व्यवस्थित मस्तिष्क की तकनीकी से जीवन के हर आयाम को विकसित एवं खुशहाल किया जा सकता है, शरीर, मन और चेतना क्या है और इसे कैसे महसूस किया जाता है, प्रयोंगो द्वारा अनुभव कराया गया। उन्होंने आगे बताया संपूर्ण शरीर का निर्माण नाभि से हुआ और यह नाभि ही शरीर का मूल है। नाभि को कैसे विकसित और शुद्ध किया जाये, प्रयोगों के द्वारा बताया गया, मस्तिष्क के प्रकार, फीचर और हाथ की हथेलियों की शानदार प्रयोगों एवं नृत्य द्वारा मस्तिष्क के विकास पर गहरी चर्चा के लिये मंच पर प्रोफेसर, डाक्टर्स, व्यापारी, स्टूडेंट आदि को बुलाकर एक सुंदर, भावनात्मक समझ से पूरे शिविर को जीवन की गहराई में उतारने की नायाब शैली का प्रयोग किया गया। इस शहर का पहला शिविर जिसमें शरद ऋतु में प्रातः 5:30 से ही हजारों बच्चे, युवा, महिला, जवान और वृद्धजन पूरे उल्लास से शामिल हो रहे हैं , अद्भुत है,

गजब की बात है, यह शिविर मात्र 07 दिसंबर तक ही है। जिसमें दो सुबह और तीन शाम की संध्या के सत्र होंगे। इन सत्रों में यूनिवर्सल नियमों के माध्यम से ऐसे प्रयोग कराये जायेंगे, जिससे हर घर प्रेम, आनंद और ऊर्जा का मंदिर बने। अभी तक पूरे भारतवर्ष एवं विदेशों में 400 से अधिक सन टू ह्यूमन के शिविर लग चुके हैं, यह शिविर किसी समाज, समूह, संस्था से जुड़ा हुआ नहीं है, पूर्णतः निःशुल्क है, आचरण एवं प्रयोग युक्त है, यूनिवर्सल है, गुरु शिष्य परंपरा से मुक्त है। आज रामवतार अग्रवाल, विनोद जैन, शिव अग्रवाल, पी एन बजाज, महेंद्र जैन, डॉ विनोद तिवारी, ललित अग्रवाल, कमलेश अग्रवाल, सुनील सुल्तानिया, अखिलानंद पांडेय, सुरेंद्र सिंह राजपूत, राजेश शर्मा, सुरेंद्र दुबे, आशा अग्रवाल, उषा अग्रवाल, निशा अग्रवाल, दीपमाला सहित विविध धर्म, सम्प्रदाय व जाति के हजारों जिज्ञासुओं ने अपनी ज्ञान की प्यास बुझाई। कल व परसों सुबह व शाम 6 बजे कुल चार सत्रों के बाद इस विस्मरणीय आयोजन का समापन होगा। अतः इस अवसर का लाभ उठाने का आग्रह किया जाता है।
