बनना हो योगी, तो बह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान करे – परमालय

प्रवचन नहीं प्रयोग नए दृष्टिकोण वाले शिविर के पांचवे दिन मानव शरीर मे स्थित चक्रों की मीमांशा करते हुए आदरणीय परमालय जी ने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी व सूर्य के चारो तरफ घूमती है। चंद्रमा पृथ्वी के चारो ओर तथा सूर्य की प्रक्रिमा करता है।मानव शरीर मे 71 प्रतिशत जल व 29 प्रतिशत अन्य ठोस होता है। मानव शरीर का जल चंद्रमा से नियंत्रित होता है। शरीर के विभिन्न अंगों के 108 पॉइंट हथेलियों में होते है। अंगुलियों को फैलाकर नाभि के सामने दोनों हाथों से जोर से तीन मिनिट तक तालियां बजाने से बी.पी., शुगर, थाइराइड आदि अनेको बीमारियों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सूर्य उत्तरायण व दक्षिणायण, चंद्रमा शुक्ल पक्ष व कृष्ण पक्ष तथा पृथ्वी दिन व रात कुल ऐसे ये 6 संयोग से 6 पहर बने है। दिन व रात के 24 घण्टो को 6 पहर में बांटा जाता है। शाम 6 बजे से 9 बजे तक सोने वाले राजयोगी, 9 से 12 बजे वाले भोगी, रात 12 से सुबह 3 बजे रोगी व सुबह 3 बजे से ब्रह्म मुहूर्त में जागने व स्नान कर साधना करने वाले योगी होते है। आज परमालय जी ने अनेकों सूक्ष्म सूक्ष्म जानकारी वैज्ञानिक तथ्यों के साथ दी। आज के सत्र में बिलासपुर की प्रथम नागरिक महापौर पूजा विधानी, रामावतार अग्रवाल, शिव अग्रवाल, विनोद जैन, डॉ वासल, डॉ विनोद तिवारी, डॉ मंडरिया, महेंद्र जैन, ललित अग्रवाल, पंकज जैन, कमलेश अग्रवाल सहित लगभग चार हजार साधक उपस्थित रहे।

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