
ब्रह्मा बाबा का जीवन दिव्य गुणों की जीवंत मिसाल है — बीके स्वाति दीदी
18 जनवरी 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में ब्रह्माकुमारीज के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 57वाँ पुण्य स्मृति दिवस अत्यंत श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने ब्रह्मा बाबा के जीवन से जुड़े “18 कदम” विस्तार से बताए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मा बाबा का संपूर्ण जीवन श्रेष्ठ संस्कारों और दिव्य गुणों की जीवंत मिसाल है। वे सदा सभी को अपने से भी ऊँचा देखने की भावना रखते थे, सबके स्नेही, सहयोगी और निरंतर योगी थे। उनका प्रत्येक संकल्प इच्छा व लगाव से मुक्त था।
दीदी ने बताया कि ब्रह्मा बाबा में गंभीरता और रमणीकता का अद्भुत संतुलन, सर्वगुणों में मास्टर सागर बनने की विशेषता, निमित्त और निर्माणचित्त रहने का भाव, सच्चे सेवाधारी होने का संस्कार स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। त्याग और भाग्य—दोनों में वे नंबर वन थे। वे परोपकारी थे और परिवर्तन शक्ति द्वारा सदा विजयी थे।
बीके स्वाति दीदी ने उपस्थित सभी भाई-बहनों से आह्वान किया कि यदि जीवन में सच्ची सफलता, शांति और संतोष चाहिए, तो ब्रह्मा बाबा के इन गुणों को अपने जीवन में धारण करना होगा। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस पुण्य स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में राजयोग भवन सेवाकेंद्र में ब्रह्माकुमारीज मुख्यालय पांडव भवन में स्थित चार धाम के प्रतिरूप, शांति स्तंभ, खजूर के पत्तों से निर्मित बाबा की कुटिया, ब्रह्मा बाबा का कमरा तथा हिस्ट्री हॉल का विशेष सृजन कर सुंदर फूलों से सजाया गया। इन सभी आध्यात्मिक प्रतिरूपों ने आगंतुकों को ब्रह्मा बाबा के अलौकिक जीवन और यज्ञ की प्रारंभिक यात्रा का सजीव अनुभव कराया।
अनेक भाई-बहनों ने यह अनुभूति साझा की, कि मानो कुछ क्षणों के लिए वे स्वयं को शरीर से अलग, परम शांति की स्थिति में अनुभव कर रहे हों।
इस अवसर पर प्रातःकाल से ही राजयोग ध्यान का विशेष कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, जो पूरे दिन चलता रहा। सैकड़ों भाई-बहनों ने सेवा केंद्र पहुँचकर योगाभ्यास किया और आत्मिक शांति का अनुभव किया। वातावरण पूर्णतः पवित्र, शांत और दिव्य अनुभूति से ओतप्रोत रहा।
इससे पूर्व सुबह अमृतबेला से ही योग अभ्यास चलता रहा। ईश्वरीय महावाक्यों का श्रवण कर बाबा को 57 प्रकार का भोग स्वीकार कराया गया। ब्रह्मा बाबा को श्रद्धा सुमन अर्पित कर चार धाम की यात्रा करते ईश्वरीय वरदान लेने के पश्चात विशेष दूध-गाजर की खीर का प्रसाद ग्रहण किया।
दीदी ने कहा आज का दिन केवल स्मृति दिवस नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन और जीवन में श्रेष्ठ संस्कारों को धारण करने का दिन है। सभी ने ब्रह्मा बाबा के पदचिन्हों पर चलने और उनके दिखाए मार्ग को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर

