*राकेश मिश्रा की रिपोर्ट*
बिलासपुर छत्तीसगढ़ के मसीही (क्रिश्चियन) समुदाय ने राज्य में कथित रूप से बढ़ रहे सामाजिक उत्पीड़न, झूठे धर्मांतरण के आरोपों तथा आराधना/उपासना के लिए प्रशासनिक अनुमति लेने के दबाव के विरोध में देश के सर्वोच्च पदाधिकारियों को ज्ञापन प्रेषित किया है। यह ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय गृहमंत्री एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को संबोधित कर जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा गया है।

ज्ञापन में समुदाय ने आरोप लगाया है कि कुछ हिंदू संगठन, जिनमें बजरंग दल का नाम उल्लेखित है, तथा असामाजिक तत्वों द्वारा आराधना के दौरान व्यवधान उत्पन्न किया जा रहा है। साथ ही झूठे धर्मांतरण के आरोप लगाकर शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, जिन पर पुलिस द्वारा एफआईआर भी की जा रही है।
संविधानिक अधिकारों का हवाला
मसीही समाज ने अपने ज्ञापन में कहा है कि भारत का संविधान अनुच्छेद 25 से 28 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति अपनी निजी संपत्ति पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर सकता है और इसके लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद, समुदाय का आरोप है कि प्रशासन द्वारा चर्चों एवं आराधना स्थलों के पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर बैंक खातों सहित विस्तृत जानकारी मांगी जा रही है, जबकि अन्य संप्रदायों से ऐसी जानकारी नहीं ली जा रही। इसे उन्होंने भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया है। कब्रिस्तान व दफन प्रक्रिया पर भी आपत्ति
ज्ञापन में कांकेर (उत्तर बस्तर) क्षेत्र में शव दफनाने पर रोक लगाए जाने की सूचना का भी उल्लेख किया गया है, जिसे समुदाय ने असंवैधानिक बताया है। साथ ही, पूर्व में दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई न होने तथा आरोपियों की गिरफ्तारी लंबित रहने पर प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए गए हैं।
पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
समुदाय ने आरोप लगाया कि कई मामलों में धार्मिक स्थलों में व्यवधान, महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार और त्योहारों के दौरान उपद्रव की घटनाएं सामने आई हैं। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है और उपद्रवियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई।
प्रमुख मांगें
ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें की गई हैं—
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
झूठे धर्मांतरण मामलों में फंसाने वालों पर कठोर कार्रवाई हो।
प्रशासन को संविधानानुसार मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु निर्देशित किया जाए।
मसीही एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा प्रदान की जाए।
पूर्व में की गई शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई एवं गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
पुलिस प्रशासन की कथित पक्षपातपूर्ण भूमिका की जांच की जाए।
ज्ञापन के साथ उच्च न्यायालय के निर्णय की प्रति एवं चर्च को भेजे गए नोटिस की छायाप्रति संलग्न की गई है।
मसीही समाज ने केंद्र व राज्य सरकार से इस विषय में त्वरित संज्ञान लेकर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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