‘कर्मो की कुशलता ही योग है‘ – डाॅ. (श्रीमती) अंजू शुक्ल

डी.पी. विप्र महाविद्यालय के सभागार में दसवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. (श्रीमती) अंजू शुक्ला ने करते हुए कहा कि ‘योगः कर्मसु कौशलम्‘ कि योग के द्वारा ही कर्मो में कुशलता प्राप्त होगी। यहां योग का अभिप्राय व्यायाम या शारीरिक कसरत से नहीं, अपितु चित्त की वृत्तियों को स्थिर कर, एकाग्र मन से किसी भी कार्य को करना है। किसी भी कार्य को ध्यान से सुनना और जीवन में ग्रहण करना ही योग है। यही हमें जीवन में अनुशासित करता है।

आगे उन्होंने गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘योगस्य कुरू कर्माणि सड्गं व्यक्त्वा धनंजय‘‘ कि सभी को फल की आकांक्षा से विवर्जित होकर कर्म करना चाहिए। योग एक ध्यान की प्रक्रिया ही नहीं है, बल्कि जीवन के सभी पक्षों में संतुलन बनाये रखना है। उन्होंने ‘योगसूत्र‘ की रचयिता पतंजलि के द्वारा बताये गये आठ अंगों यम, नियम, आसान, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के बारे में बताया कि इसके नियमित अभ्यास से हम स्वस्थ एवं कल्याणकारी जीवन का निर्वहन कर सकते हैं। इस अवसर पर श्रीमती मृदुला पाठक द्वारा सभी को योगाभ्यास कराया गया।

कार्यक्रम का सफल संचालन डाॅ. एम.एस. तम्बोली ने करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, इस वर्ष इसका विषय ‘‘स्वयं एवं समाज के लिए योग‘‘ है इस विचार को लेकर यदि सभी नियमित योगाभ्यास करते हैं तो निश्चित ही हम स्वयं एवं समाज को स्वस्थ एवं समृद्ध बना सकते हैं। सभी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बधाई देते हुए डाॅ. आभा तिवारी ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर डाॅ. मनीष तिवारी, डाॅ. संजय तिवारी, प्रो. ए.श्रीराम , प्रो. निधिष चैबे, डाॅ. एम.एल. जायसवाल, प्रो. विश्वास विक्टर, डाॅ. ऋचा हाण्डा, डाॅ. अजय यादव, श्री शैलेन्द्र तिवारी, डाॅ. शिखा पहारे, डाॅ. खगेन्द्र सोनी, श्री यूपेश कुमार डाॅ. सुरुचि मिश्रा, श्रीमती सृष्टि कांसकर, श्री सगराम चन्द्रवंशी, श्रीमती उपासना पाण्डेय, श्रीमती चन्द्रभान सिंह राजपूत एवं महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, कर्मचारी बंधु एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहे।

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