राकेश मिश्रा की रिपोर्ट
बिलासपुर। केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के विरोध में बुधवार को देशभर में ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी श्रमिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।

शहर के नेहरू चौक के पास विभिन्न ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संगठनों के सैकड़ों सदस्य एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि नए श्रम कानूनों से श्रमिकों के संगठन बनाने का अधिकार कमजोर हो रहा है, सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति घटेगी और 8 घंटे कार्यदिवस की व्यवस्था प्रभावित होगी।

प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एवं बीमा कंपनियों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की नीतियां श्रमिक विरोधी हैं और इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
यह हड़ताल देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और 100 से अधिक संगठनों के संयुक्त आह्वान पर की गई। संयुक्त किसान मोर्चा और कांग्रेस ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

