शारीरिक और मानसिक रूप से स्वतंत्र ही सच्ची स्वतंत्रता है __ ब्रह्माकुमारी समीक्षा बहन

मन के नकारात्मक व व्यर्थ विचारों की गुलामी से मुक्त होना ही सच्ची स्वतंत्रता है

भारत देश में हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है इसके तहत ही प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय बिलासपुर टिकरापारा में भी तिरंगा झंडा फहराया गया जिसमें संस्था के सभी भाई बहनें सम्मिलित हुए |
कहते हैं हमारे ऊपर कोई राज्य नहीं चल रहा पूरी तरह से स्वाधीन है लेकिन जब बाहर के लोगों से हमने अपने आप को छुटकारा दिला ही दिया है तो फिर क्या बचा है जो हमें परेशान कर रहा है वास्तव में सच्ची स्वतंत्रता तभी हो सकती है जब हम स्वयं को बुराइयों से दुर्व्यसनो से मुक्त करें| भारत देश तो स्वतंत्र हो चुका है परंतु हम अनेक प्रकार के नाकारात्मक व व्यर्थ विचारों के बंधन में स्वयं को फंसा लिए है जैसा हमारा मन कर रहा है वैसा सोच रहे हैं कर |रहे हैं इससे और ही हमारे जीवन में परतंत्रता आ चुकी है अब स्वयं के अंदर की स्वतंत्रता चाहिए तो हमें सकारात्मक विचारों को अपने जीवन में स्थान देना होगा और वास्तव में वही सच्ची स्वतंत्रता है | जब मैं स्व को सम्मान देना शुरू करती हूं स्व का मतलब आत्मा के सारे गुण- ज्ञान, पवित्रता, शांति के आधार से अपने को अलर्ट रखती हूं तो पराधीन करने वाले शत्रु हमसे बहुत दूर रहते हैं और हम अपने घर में अंदर के दुश्मनों से लड़ पाते हैं तो जब हम ऐसा करना शुरू करेंगे तो हम सब के अंदर का जो गुलामी का संस्कार है जो बंधनों में हम जकड़े हुए हैं वो हम उसे धीरे-धीरे परे और पार हो जाएंगे |तो शारीरिक रूप से भी स्वतंत्र और मानसिक रूप से भी स्वतंत्र हो पाएंगे | तो अब अपनी स्वाधीनता को परमात्मा के आधार से जगाओ| सुबह के अधीन सारे विकारों को करो तभी हमारा सच में स्वतंत्रता मनाना सार्थक होगा |

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