नववर्ष युगाब्द 5127 के अवसर पर भारत के विभिन्न प्रांतों में युगादि/नवरात्रि/उदागी/गुड़ी पड़वा/झूलेलाल जयंती आदि उत्साहपूर्वक मनाई जा रही हैं। इस पावन अवसर पर आज लगातार 7वीं बार शुभम् विहार कल्याण समिति एवं अंकुश सपोर्ट एंड वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में शुभम् विहार कॉलोनी के सभी बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और मातृशक्ति के द्वारा नववर्ष के पावन पर्व पर आज सुबह 7 बजे शुभम् विहार शिव मंदिर से 27 खोली हनुमान मंदिर तक भव्य शोभायात्रा को संबोधित करते हुए हिंदू दैनंदिनी न्यास के ललित अग्रवाल ने बताया कि ग्रहों की स्थिति को जानने के लिए बाहरी आकाश को दो प्रकार से विभाजित किया गया है: राशि और नक्षत्र। जब सारे ग्रह एक ही नक्षत्र पर आ जाते हैं, नए युग का प्रारम्भ होता है। ऐसा होने में न्यूनतम 4,32,000 वर्ष लगते हैं।


अंग्रेज़ी दिनांक अनुसार पिछली बार 20 फरवरी ईसा पूर्व 3102 में ऐसा हुआ था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नश्वर शरीर त्याग किया और तभी से कलियुग प्रारम्भ हुआ था।
3102 ईसा पूर्व में 2025 ईसा पश्चात जोड़ दें तो कलियुग को 5127 वर्ष हो गए और आज 30 मार्च से युगाब्द 5127 शुरू हुआ है । वर्ष को परिभाषित करते हुए उन्होंने बताया कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर रही है और पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने के लिए जितना समय लगता है वह एक वर्ष कहलाता है। अर्थात् नव-वर्ष दिवस उस दिन को कहेंगे जहां से हम पृथ्वी की परिक्रमा का प्रारंभ मानेंगे। वैसे तो यह कोई भी दिन हो सकता है किन्तु अधिक उचित होगा यदि इस दिन का निर्धारण एक तार्किक आधार पर किया जाए। परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि पृथ्वी की इस परिक्रमा के दो परिणाम है। पहला इस परिक्रमा के कारण दिन और रात की अवधि बदलती रहती है और दूसरा इस परिक्रमा के कारण ऋतुओं का परिवर्तन होता है। पृथ्वी के इस परिक्रमण में 2 दिन ऐसे आते हैं जब दिन और रात समान हो जाते हैं और दो दिन ऐसे आते हैं जब दिन और रात की अवधि में अंतर सर्वाधिक होता है।

तो अन्य किसी दिन के तुलना में इन चारों में से किसी एक दिन को इस परिक्रमा का प्रारंभ अर्थात नव वर्ष दिवस माना जाए तो यह तार्किक होगा ऐसा विचार आया। इन चारों में से कौन सा दिन मानना अधिक तार्किक होगा यह सोचा, तो पाया कि वे दो दिन, जब दिन रात समान होते हैं, उनमें से एक दिन हमें वर्ष का प्रारंभ मानना चाहिए। तो इन दोनों दिनों में क्या अंतर है इसे देखने पर ध्यान आया कि एक ऐसे दिन के पश्चात दिन बड़े होते हैं और दूसरे ऐसे दिन के पश्चात रातें बड़ी होने लगती हैं। तो सामान्य मनोभाव कहता है कि जिसके पश्चात दिन बड़े होते हैं, उसी दिन को हमें वर्षारंभ मानना चाहिए। तो ऐसा दिन तो 21 या 22 मार्च पड़ता है।
इससे एक बात और ध्यान आई की मार्च का महीना वसंत का महीना है जब प्रकृति नव सृजन करती है तो लगा कि ऋतुओं के आधार पर भी यह दिन वर्षारंभ मानने के लिए सही है। आगे एक बात और ध्यान आई। मार्च का अर्थ होता है आगे बढ़ना। मार्च को पहला महीना मानें तो सितंबर आता है सातवां महीना। सेप्टम्बर में सेप्टा का अर्थ भी सात होता है। अक्टूबर होता है आठवां महीना। ओक्टो का अर्थ भी आठ होता है। नवंबर में नोवा का अर्थ नौ होता है, दिसंबर में डेका का अर्थ दस होता है। तो यह भी तार्किक है। आगे ध्यान आया कि यदि हम कहीं कोई वितरण करते हैं तो जो कम अधिक होता है वह अंत वाले के भाग में आता है तो जब वर्ष के महीनों को दिनों का वितरण किया गया तो अंत में बचे 28 दिन, जब की सभी महीने तो 30 या 31 दिन के बने थे, तो ये 28 दिन फरवरी को दिए गए। और जब लीप ईयर आता है तो अंत में बचते हैं 29 दिन तो वह एक अतिरिक्त दिन भी फरवरी को दिया जाता है। अर्थात कभी फरवरी वर्ष का अंतिम मास होता रहा है।


अतः शक संवत के अनुसार 21 या 22 मार्च को या चंद्र पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को जो 21- 22 मार्च के आसपास ही पड़ती है, वर्ष आरंभ मानना अधिक तार्किक है। तदनुरूप आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही नववर्ष पूर्णतया वैज्ञानिक हैं।
पीला ,लाल,गेरूवा वस्त्र धारण किये श्रद्धालुओं पर स्वयंस्फूर्त जनता द्वारा पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। रास्ते भर शंख ,घंटा ध्वनि,झांल मजीरा के आध्यात्मिक सुर से आकाश गुन्जायमान था। शुभम् विहार कल्याण समिति के द्वारा भव्य प्रसाद की व्यवस्था की गई । अष्टगंध और सिन्दूर का त्रिपुण्ड सभी के माथे पर अत्यंत मनोहारी और हिन्दूमय लग रहे थे। वार्ड नम्बर 15 के युवा पार्षद नितिन पटेल शुरू से आखरी तक अपनी उपस्थिति देकर वार्ड वासियों के दिल जीत लिया। आज नववर्ष पर नशामुक्त भारत बनाने हेतु 100% हिंदुओ के हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लेते हुए युगाब्द 5127 की हिंदू दैनंदिनी का विमोचन भी किया गया। शोभायात्रा को सफल बनाने में अखिलानंद पांडेय, नरेंद्र गोपाल, सत्यनारायण पांडेय, हरि भाई पटेल, हेमंत पटेल,गुणवंत पटेल, राजन सिंह, राजेश शर्मा, उमेश पाण्डेय, निलेश अग्रवाल,भूपेन्द्र यादव, दीपक यादव, हृदयानंद पाण्डेय,संतोष तिवारी,डी पी सक्सेना ,एम एल बरसैया, आर पी मिश्रा, रितेश पटेल,ललित अग्रवाल, छगनलाल यादव, ह्रदयानंद पाण्डेय, आकाश शर्मा ,लता पटेल, कौशल्या साहू, सुमन मिश्रा, स्मिता नामदेव, विजय नामदेव,सीमा पांडेय, लक्ष्मी साहू, सरिता , तेजी, नीरज, शिवा , उदित, अभय, विशु, शान्तनु, मोनिका अग्रवाल, सत्या , इन्दुबाला, रेनु पाण्डेय, उमेश पाण्डेय, राजेश पाण्डेय, निशा अग्रवाल, गुड्डी पाठक , राम किशुन रजक, ,मंयक अग्रवाल, सुमन मिश्रा, प्रभात उपाध्याय,पियूष, शिवांश पाण्डेय, आर्या पाण्डेय, आज के नववर्ष रैली में संजीव बाजपेयी, हेमंत पटेल,धीरज पटेल, ईश्वर तिवारी,एस के दुबे, शालिनी सोनी, तारा पटेल, सुनील बाजपेयी, संजना मिश्रा, कौशल्या साहू,रीता सिंह, रेवती सोनी,रानू पाण्डेय, आकाश शर्मा, संतोष तिवारी, गुणवंत पटेल,नरेन्द्र गोपाल,बी के पाण्डेय, उमेश पाण्डेय,आर पी मिश्रा, निशा यादव, लक्ष्मी साहू,कमला देवी, संगीता नागर,संतोष सोनी, गुड़िया चौबे, मधुबाला तिवारी, प्रमोद तिवारी, सरिता पाण्डेय, एम एल बरसैंया, सत्यनारायण पाण्डेय, पूजा शर्मा, स्वाति सिंह,आशा सिंह, श्वेता गोस्वामी, गुड्डी पाठक, अनिल तिवारी जी ,बैकुंठनाथ जायसवाल, मृणाल कांति रॉय, ईश्वर पटेल, करसन भाई पटेल, कांति भाई पटेल, कुलदीप जायसवाल, आदि श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। आज शोभा यात्रा का विशेष आकर्षण नन्हें रुद्रांश गर्ग ने राम व आर्या पाण्डेय जानकी को जीवंत किया। 21 स्थानों पर पुष्प वर्षा पांच स्थानों पर शीतल पेय, लस्सी, फ्रूटी की व्यवस्था श्री पवन उपाध्याय जी, सुभाष साहु जी, विक्की गुप्ताजी, राकेश चौबे जी, विनोद जायसवाल जी द्वारा की गई।
इसकी जानकारी शुभम् विहार कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री अखिलानंद पाण्डेय जी द्वारा दी गई। 🕉️🚩🚩🚩🚩🕉️

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