*राकेश मिश्रा की रिपोर्ट*बिलासपुर, 13 फरवरी 2026। नगर निगम बिलासपुर की सामान्य सभा शुक्रवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। लिंगियाडीह क्षेत्र में कथित अतिक्रमण हटाने और पट्टा वितरण के मुद्दे पर कांग्रेस पार्षदों व स्थानीय रहवासियों ने स्वर्गीय लखीराम ऑडिटोरियम के गेट पर धरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते परिसर सियासी रणभूमि में बदल गया और सभा की कार्यवाही प्रभावित हुई।

विपक्ष के नेता भरत कश्यप के नेतृत्व में पार्षदों ने आरोप लगाया कि सड़क और गार्डन निर्माण के नाम पर गरीब परिवारों के मकान तोड़े जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पहले पट्टा देने का आश्वासन दिया गया और कई लोगों से राशि भी ली गई, लेकिन अब तक वैध पट्टा नहीं मिला। उन्होंने प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही निगम के खजांची को हटाने और आर्थिक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

तनाव तब बढ़ गया जब कांग्रेस शहर अध्यक्ष सिधांशु मिश्रा और जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को गेट पर रोक दिया गया। इसे लेकर निगम कर्मचारियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई। आक्रोशित कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में महिलाएं सड़क पर उतर आईं और करीब एक घंटे तक चक्काजाम किया, जिससे यातायात बाधित रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

इधर, सभा के भीतर भी पेयजल संकट पर जोरदार हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेसी पार्षदों ने जल विभाग पर खराब पंपों और जली मोटरों की समय पर मरम्मत न करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कई वार्डों में हफ्तों से पानी की किल्लत है और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। सत्तापक्ष पर वार्डों के बीच भेदभाव का आरोप भी लगाया गया।


महापौर पूजा विधानी के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी पार्षदों ने नारेबाजी की। हंगामे के बीच महापौर और निगम अध्यक्ष ने अधिकारियों को तत्काल खराब पंप दुरुस्त करने के निर्देश दिए। हालांकि देर शाम तक विरोध जारी रहा और लिंगियाडीह का मुद्दा नगर राजनीति में बड़ा सियासी सवाल बनकर उभर आया है। अब नजर निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को मिलने वाले न्याय पर टिकी है।


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