नई दिल्ली—–केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 किसी बड़े तोहफे या झटके वाला बजट नहीं है, बल्कि यह बजट मौजूदा परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने और धीरे-धीरे सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस बार आम आदमी पर न तो कोई नया टैक्स लगाया है और न ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला है।
महंगाई, रोजगार, खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य और टैक्स—आज आम नागरिक की सबसे बड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह जल्दबाज़ी में बड़े फैसले लेने के बजाय योजनाबद्ध और स्थिर सुधारों के पक्ष में है।
पुरानी योजनाओं को मज़बूती, नई योजनाओं से परहेज़
बजट में नई योजनाएँ लाने की जगह पहले से चल रही योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर ज़ोर दिया गया है। महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों को सस्ता कर्ज, लखपति दीदी योजना, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और बच्चों की देखभाल की सुविधाएँ इसी सोच का हिस्सा हैं। सरकार का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से परिवार और समाज दोनों सशक्त होंगे।
किसानों पर फोकस: स्थायी आय की कोशिश
किसानों के लिए फसल बीमा, सिंचाई सुविधाओं और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात बजट में प्रमुखता से रखी गई है। साथ ही मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से मंडी भाव और मौसम की जानकारी देकर किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करने का लक्ष्य रखा गया है।
युवाओं के लिए हुनर और स्वरोज़गार का संदेश
बजट में युवाओं को नौकरी तलाशने तक सीमित न रहकर अपने कौशल के दम पर स्वरोज़गार और स्टार्टअप की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके लिए प्रशिक्षण, स्टार्टअप और उद्योगों को समर्थन देने की बात कही गई है।
गरीब वर्ग के लिए बुनियादी ज़रूरतों पर ज़ोर
गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए आवास, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने दोहराया है कि योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो।
टैक्स में राहत नहीं, लेकिन भरोसा
आयकर को लेकर बजट में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। नया आयकर कानून 2025 अब 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और टैक्स स्लैब पहले जैसे ही रहेंगे। इसका मतलब है कि आम करदाता पर कोई नया टैक्स बोझ नहीं पड़ेगा।
इनकम टैक्स रिटर्न में गलती सुधारने की समय-सीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है, जिससे करदाताओं को राहत मिलेगी।
विदेश में पढ़ाई, इलाज, आवश्यक खर्च और ओवरसीज टूर पैकेज के लिए भेजी जाने वाली राशि पर टीसीएस दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है।
आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि भी स्पष्ट की गई है—
फॉर्म-1 और फॉर्म-2 भरने वालों के लिए 31 जुलाई
अन्य नॉन-ऑडिट करदाताओं के लिए 31 अगस्त
समय पर रिटर्न भरने से जुर्माने से बचा जा सकेगा और रिफंड भी जल्दी मिलेगा।
कॉरपोरेट और निवेश से जुड़े बदलाव
अब किसी भी कंपनी द्वारा शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। वहीं कम या शून्य टीडीएस के लिए करदाताओं को आयकर अधिकारी के पास जाने की आवश्यकता नहीं होगी, यह प्रक्रिया अब स्वचालित होगी।
भविष्य की तैयारी पर भी नज़र
बजट में 2 नए NIMHANS इंस्टीट्यूट, पहाड़ी क्षेत्रों में माउंटेन ट्रेन, एस्ट्रोनॉमी के लिए टेलिस्कोप मिशन, रेयर अर्थ मेटल, और सेमीकंडक्टर विनिर्माण जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जो भविष्य के भारत को मजबूत बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 कोई चमत्कारिक बजट नहीं है, लेकिन यह स्थिरता, भरोसे और धीरे-धीरे सुधार का भरोसा ज़रूर देता है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि बजट में किए गए ऐलान ज़मीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बजट वास्तव में आम आदमी के लिए राहत और विश्वास का बजट साबित हो सकता है।

