नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है, जिसके कारण देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की वृद्धि की गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है, इसलिए क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध या तनाव की स्थिति में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसका असर धीरे-धीरे उन देशों पर भी पड़ता है जो आयात पर निर्भर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।

स्थिति को देखते हुए भारत सरकार अब वैकल्पिक देशों से कच्चा तेल और गैस आयात करने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इस बीच अमेरिका द्वारा रूस से भारत को कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के बाद तेल आपूर्ति को लेकर तत्काल संकट कुछ हद तक कम माना जा रहा है, हालांकि गैस की आपूर्ति के लिए अभी भी अन्य विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
वहीं आम नागरिकों का कहना है कि सरकार को ऐसे दीर्घकालिक उपाय करने चाहिए जिससे ऊर्जा आपूर्ति भी बनी रहे और महंगाई का बोझ सीधे आम जनता पर न पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाना और वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर देना भविष्य में ऐसे संकटों से निपटने में मददगार साबित हो सकता है।

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