प्राकृतिक खेती कृषक क्यों करें,खेती में लगातार हो रहे अंधाधुन्ध रसायन के प्रयोग तथा उसके कुप्रभाव की जानकारी दी गई किसानों को

दो दिवसीय प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण सम्पन्न

बिलासपुर। कृषि विज्ञान केन्द्र, बिलासपुर एवं कृषि विभाग के सामूहिक तत्वाधान में दो दिवसीय एक्सटेंशन रिफार्म्स योजना अंतर्गत आरएलपी बेस्ड प्राकृतिक खेती पर कोटा विकासखण्ड के 55 कृषकों को 5 और 6 अगस्त तक कृषि विज्ञानं केंद्र में प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख,डॉ. गीत शर्मा ने दो दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण का शुभारम्भ किया ,साथ ही प्राकृतिक खेती कृषक क्यों करें इस पर भी चर्चा की। खेती में लगातार हो रहे अंधाधुन्ध रसायन के प्रयोग तथा उसके कुप्रभाव की जानकारी दी। साथ ही प्राकृतिक खेती में बायो इनपुट बीजमृत, जीवामृत, घनजीवामृत से खेतों पर होने वाले प्रभाव के बारे में कृषकों को अवगत कराया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक,जयंत साहू ने बीजमृत, जीवामृत, घनजीवामृत बनाने की विधि पर व्याख्यान दिया। डॉ. शिल्पा कौशिक मोदी ने देशी गाय के प्रयोग तथा प्राकृतिक खेती में मल्चिंग व खरपतवार नियंत्रण पर व्याख्यान दिया। डॉ. निवेदिता पाठक ने वर्षभर प्राकृतिक खेती में पोषक सब्जियों के उत्पादन के बारे में तथा उनके जैविक रखरखाव पर प्रशिक्षण दिया। श्रीमती हेमकांति बंजारे ने केन्द्र में प्राकृतिक खेती युनिट का अवलोकन करवाकर कृषकों को प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में प्रशिक्षण दिया। केन्द्र की वैज्ञानिक डॉ. एकता ताम्रकार एवं डॉ. स्वाति शर्मा ने कृषकों को प्रदर्शन के साथ-साथ अग्निआस्त्र, ब्रम्हास्त्र, नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क बनाने का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार शुक्ला इंजी. पंकज मिंज तथा कृषि विभाग से विनोद साहू एवं केन्द्र के सभी कर्मचारियों का सफल योगदान रहा।

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