कुदुदंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बच्चे आज भी बरामदे में पट्टी में बैठ कर पढ़ने को मजबूर है। हाल ही में प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग को तोड़कर स्मार्ट स्कूल फंड से नए भवन का निर्माण किया गया था। लेकिन स्कूल की प्रिंसिपल रीता तिवारी के द्वारा नव निर्मित सभी कमरों में ताला लगवा दिया जा रहा है, जिसके चलते छात्र बरामदे में बैठ कर पढ़ने को मजबूर है। वही मिडिल और प्राइमरी के शिक्षकों को लिए स्टाफ रूम भी नहीं अलॉट किया गया है। शिक्षकों के लिए बने कमरों में भी प्रिंसिपल रीता तिवारी के द्वारा टाला लगवा दिया जा रहा है। जिसके चलते बच्चो के साथ साथ शिक्षक भी बरामदे में ही कुर्सी टेबल लगा कर बैठने को मजबूर है।

मामले की पोल तब खुली जब वार्ड पार्षद श्रद्धा कमल जैन ने स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान ये पता चला कि प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चे बरामदे में बैठ कर पढाई कर रहे है। आज शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्रालय के द्वारा सभी स्कूलों को सर्वसुविधा से परिपूर्ण करने की बात की जा रही है। ऐसे इस तरह की घटना सामने आना शिक्षा विभाग पर बड़े प्रश्न खड़े करती है। की आखिर क्यों इतने दिनों से छात्र बरामदे में बैठ कर पढ़ने को मजबूर है।

साथ ही स्कूल की प्रिंसिपल रीता तिवारी के द्वारा स्कूल में शौचालय में भी ताला लगवा दिया जा रहा है। प्रिंसिपल का कहना है कि शौचालय हाई स्कूल के बच्चो के लिए है, प्राइमरी मिडिल इस्तेमाल करें तो गन्दा कर दोगे इसलिए शौचालय में ताला लगवा दिया जा रहा है। जबकि विद्यालय परिसर के अंदर तीन से चार बाथरूम उपलब्ध है। इसके चलते स्कूल पहुंचे बच्चो के पास प्रसाधन की कोई व्यवस्था नहीं है।

पार्षद श्रद्धा कमल जैन और वार्ड प्रभारी कमल जैन ने कल प्राचार्य को बात करने बुलाया तो उसने कल सभी एचएम के साथ मीटिंग की।

आज शिकायत मिली कि स्कूल के कमरो का ताला चाभी से खोलकर पंखे ग़ायब हो गये है।

स्कूल परिसर के अंदर छात्रों की स्थिति तो बुरी है साथ ही साथ शिक्षकों को भी कोई तवज्जो नहीं मिल रहा है। बच्चो के कमरों में ताला लगवाने के साथ ही शिक्षकों के बैठने के लिए बनाए गए स्टाफ रूम में भी ताला लगवा दिया जा रहा है और वो स्टाफ रूम सिर्फ़ कुछ हाई स्कूल के शिक्षकों के लिए खुलता है। जिसके चलते बाक़ी शिक्षक भी बरामदे में ही टेबल चेयर लगा कर ही बैठ रहे है। इसके अलावा सुचना मिली कि स्कूल प्रिंसिपल रीता तिवारी शिक्षकों के बीच भी पक्षपात करती है। हाई स्कूल के कुछ शिक्षकों के साथ उनका व्यवहार अलग है तो वही मिडिल और प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों के साथ अलग होता है।

और सबसे अचंभे की बात यह है कि जिन कमरों में स्कूल की प्राचार्य रीता तिवारी ताला लगा कर जा रही है उन कमरों के पंखे ताला खुलकर लगातार ग़ायब होते जा रहे है ।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।