बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल के सक्षम नेतृत्व, कुशल मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी योजना निर्माण के परिणामस्वरूप केन्द्रीय विश्वविद्यालय के वानिकी, वन्यजीव एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं उत्तर प्रदेश कैम्पा के मध्य हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ। इस अवसर पर कुलपति महोदय प्रो. चक्रवाल ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हर्ष व्यक्त करते हुए विभाग के समस्त शिक्षकों को शोध, अनुसंधान एवं नवाचार के साथ ही उद्यमिता विकास के लिए सतत् कार्य करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं से विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलती है।
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को उत्तरप्रदेश वन विभाग के द्वारा कैम्पा मद में कराये गए कार्यो का बाह्य अनुश्रवण एवं मूल्याकन कार्य सम्पादित करने हेतु चार करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इस कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट के अंतर्गत सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के 89 वन मंडलों में वर्ष 2012 से 2022 तक कैम्पा मद में किये गए कार्यो का मूल्याकन किया जाना हैI इस हेतु विश्वविद्यालय के प्राकृतिक संसाधन विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. एस.सी. तिवारी तथा प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं हेड ऑफ़ फारेस्ट उत्तरप्रदेश वन लखनऊ श्री सुधीर कुमार शर्मा, (भारतीय वन सेवा) ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।
उल्लेखनीय है कि वानिकी विभाग को भारतीय वानिकी, अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् भारत सरकार द्वारा A ++ ग्रेड प्रदान किया गया है जो वर्ष 1989 से ही मध्य भारत में वानिकी विषय पर उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है। वानिकी विभाग विभागाध्यक्ष प्रो. के के चन्द्रा ने बताया कि वानिकी विभाग प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के विभिन्न संस्थानों जैसे छत्तीसगढ़ फारेस्ट, नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन, अदानी फाउंडेशन, कोल इंडिया, राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण के कई कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुका है।
इस प्रोजेक्ट में मुख्य अन्वेषक डॉ. बृजेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. चंद्रेश कुमार सिंह, सह-अन्वेषक डॉ. अतुल कुमार भारद्वाज एवं डॉ. चोव्लानी मंपूंग सहायक प्राध्यापक वानिकी, वन्यजीव एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग है। इस अवसर पर प्रदेश के श्री सुनील चौधरी प्रधान मुख्य वन संरक्षक मॉनिटरिंग एवं वर्किंग प्लान, श्री अशोक कुमार, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एच.आर.डी., उत्तरप्रदेश फारेस्ट, श्री पिनाकी प्रसाद सिंह, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तरप्रदेश फारेस्ट एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैम्पा उत्तरप्रदेश फारेस्ट, श्रीमती अनुराधा वेमुरी, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तरप्रदेश फारेस्ट प्रोजेक्ट एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।