बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) एवं शिक्षा मंत्रालय छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन दिनांक 15 मार्च, 2024 को रजत जयंती सभागार में किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा की गुणवत्ता में गुणात्मक परिवर्तन लाने वाला क्रांतिकारी दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अनुभवजन्य ज्ञान प्रदान किया जाना वर्तमान समयकाल की प्राथमिकता है ताकि वे उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सकें।
कुलपति प्रो. चक्रवाल ने कहा कि गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को सफलतापूर्वक मूल भावना के अनुरूप समग्र रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है उससे प्राप्त अनुभव को छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन हेतु साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से केन्द्रीय विश्वविद्यालय में चली जा रही है विभिन्न अभिनव योजनाओं जिनमें स्वावलंबी छत्तीसगढ़. स्वाभिमान थाली, श्रवण लाइन, हर्बल गुलाल, राखी, काष्ठकला, बैंबूआर्ट, प्रायोगिक तौर पर मशरूम उत्पादन, ब्रेड निर्माण तथा औषधीय गुणों से संपन्न उत्पाद आदि को जानने समझने एवं क्रियान्वित करने का अवसर प्राप्त होगा।


श्रीमती शारदा वर्मा, आयुक्त उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर छत्तीसगढ़ ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने के लिए संकल्पित है।
इससे पूर्व प्रारंभ में मंचस्थ अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन कर मां सरस्वती एवं बाबा गुरु घासीदास जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये। तत्पश्चात, अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया।
कुलपति, प्राचार्य एवं शिक्षाविद् हुए शामिल
इस अवसर पर प्रो. एडीएन बाजपेयी, कुलपति, अटल बिहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर, प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलपति, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, प्रो. बी.जी. सिंह कुलपति सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर प्रो. एल.पी. पटेरिया, कुलपति, शहीद नंद कुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़, प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर, प्रो. अरूणा पलटा, कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग सहित निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा विभिन्न महादविद्यालयों के प्राचार्य एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने दिया। कार्यसाला की समन्वयक प्रो. सीमा राय व संचालन डॉ. प्रिंसी मतलानी ने किया।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।