



“जिंदगी को एक रोल की तरह जिएं, बोझ न बनाएं”- बीके संजीव
SECL के ‘जीवन जीने की कला’ कार्यक्रम में खुशहाली और नशामुक्ति का संदेश
बिलासपुर: एसईसीएल (SECL) के इंदिरा विहार कॉलोनी स्थित एचआरडी विभाग में आज एक विशेष मानव संसाधन विकास कल्याण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘जीवन जीने की कला और खुशहाली का मार्ग’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर और प्रख्यात लाइफ कोच बीके संजीव जी उपस्थित रहे,। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी, गायत्री बहन, संदीप भाई सहित एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
तनाव प्रबंधन और खुशहाली के गुर
अपने प्रभावी संबोधन में संजीव जी ने कहा कि आज के दौर में इंसान अपने मूड का गुलाम हो गया है। उन्होंने “हरियाणा रोडवेज” का उदाहरण देते हुए समझाया कि जीवन में कई परिस्थितियां और लोग ऐसे होते हैं जिनके माथे पर लिखा होता है ‘यह नूं ही चलेगी’ (यह ऐसे ही चलेगा), इसलिए उन्हें बदलने के बजाय अपनी प्रतिक्रिया बदलना जरूरी है। उन्होंने तनाव को दिल के ‘कच्चे टांकों’ की तरह बताया और सलाह दी कि किसी भी बात का ज्यादा ‘लोड’ नहीं लेना चाहिए,।
बीके संजीव ने ‘सोल’ (आत्मा) और ‘रोल’ (पद) के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमें अपनी नौकरी के पद को घर तक नहीं ले जाना चाहिए,। उन्होंने कहा, “घर वालों को पिता चाहिए, हनुमान या पुलिस इंस्पेक्टर नहीं”।
प्रायोगिक अभ्यास और मुस्कुराहट का महत्व
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘सिक्के वाली मुस्कान’ का एक विशेष अभ्यास कराया, जिसमें गालों पर काल्पनिक सिक्के रखकर मुस्कुराने की तकनीक सिखाई गई,। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मुस्कुराना ही सबसे अच्छा मेकअप है और हार कर मुस्कुराना ही असली जिंदगी है।
*नशामुक्त भारत का संकल्प
कार्यक्रम के दूसरे चरण में ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने नशामुक्ति अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नशा नाश की जड़ है और सकारात्मक चिंतन ही असली नशा होना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने ‘नशामुक्त भारत’ के निर्माण के लिए सामूहिक प्रतिज्ञा ली और अनुशासन व सदाचार के साथ जीवन जीने का संकल्प किया,।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में एसईसीएल के जीएम (कल्याण/एचआरडी) बी.सी. सेठी जी, जीएम (कल्याण) सौरभ पांडेय और मुख्य सुरक्षा अधिकारी दक्षिणा मूर्ति सहित लगभग 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समापन एक सुखद मेडिटेशन सत्र के साथ हुआ।




