चालू वितीय वर्ष 2023-24 में एसईसीएल दवारा, अपने संचालन के राज्यों मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को गत वर्ष में प्रदत्त राजस्व में बढ़ोत्तरी का अनुमान है । कम्पनी ने एक माह पूर्व ही गत वर्ष के प्रदत्त राजस्व की बराबरी कर ली है । वितीय वर्ष 2022-23 में करों के रूप में इन दोनों राज्यों मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को 14,450 करोड़ रूपये जमा कराया गया था, वहीं इस वर्ष फरवरी माह के अंत तक यह आंकड़ा 14,400 तक पहुँच चुका है । गत वर्ष रायल्टी के रूप में एसईसीएल ने छतीसगढ़ शासन को लगभग 2,900 करोड़ रूपये उपलब्ध कराया था, वहीं मध्यप्रदेश राज्य को उपलब्ध कराई गई राशि 337 करोड़ रूपये रही थी । मध्यप्रदेश को प्रदत्त रायल्टी गत वर्ष से अधिक हो चुकी है । डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (डीएमएफ) में एसईसीएल ने गत वर्ष 900 करोड़ रूपये जमा कराया था, इस वर्ष यह राशि उससे अधिक रहने की उम्मीद है । इस वित्तीय वर्ष एसईसीएल 7,000 करोड़ रूपये से अधिक का जीएसटी (सीजीएसटी/आईजीएसटी/स्टेट कम्पनसेशन सेस सहित) जमा करेगी, जिसमें अकेले छत्तीसगढ़ राज्य को 6,500 करोड़ रूपये से अधिक प्राप्त होने की प्रत्याशा है ।
एसईसीएल के वित्त विभाग से दवारा प्रस्तुत अनआडिटेड अंतरिम आंकड़ों में गत वर्ष की तुलना में संचालन राज्यों को दिए जाने वाले राजस्व में इस वर्ष वृद्धि दर्ज किये जाने का अनुमान किया गया है, वहीं फरवरी माह में मध्यप्रदेश राज्य को प्राप्त रायल्टी गत वर्ष की कुल रायल्टी से अधिक पहुँच गयी है । समग्र रूप से इस वर्ष एसईसीएल गत वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान कर रही है । एसईसीएल दवारा प्रदत्त राजस्व देश के सर्वांगीण विकास तथा विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेंगे
जनसंपर्क अधिकारी
एसईसीएल, बिलासपुर

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।