श्री महा दिव्य देशम फाउंडेशन द्वारा माना शादानी दरबार के मंगलम भवन में पांच दिवसीय महा सुहृत महा शाक्त यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। तीसरे दिन गणपति होम के साथ सुबह 6 बजे प्रारंभ हुआ। उसके बाद प्रदोष यज्ञ हुआ।
फिर महा सुहृत यज्ञ हुआ। उसके
बाद महा मृत्युजम होम हुआ। इसके पहले द्वितीय दिवस में महा धन्वंतरि को विशेष यज्ञ हुआ था।पूज्य श्री राजीव रकुल के अनुसार भगवान धन्वंतरि अमरता के देवता और देवताओं के चिकित्सक हैं। महाविष्णु के सर्वोच्च स्वरूप में वह आयुर्वेद के जनक हैं और अमृत को शुद्ध चेतना की ओर ले जाते हैं। यह यज्ञ समुदाय को संक्रमणों और बीमारियों से बचाने में मदद करता है। व्यक्ति को मानसिक शांति और अच्छा स्वास्थ प्रदान करता है और दीर्घकालिक बीमारी को ठीक करता है। व्यक्तियों में सकारात्क प्राण शक्ति को बढ़ाता है और आध्यामिकता की ओर बढ़ने में मदद करता है। साधकों के लिए ज्ञान संबंधी उच्च अवस्थाएं प्राप्त की जा सकती हैं। द्वादशी और प्रदोष के दिन किया गया होम शक्तिशाली माना जाता है।


विशेष यजमानों का विनुधि महा क्रिया किया गया। इसमें मनोविकृति, मंदबुद्धि, व्यसन और मादक द्रव्यों के सेवन के इलाज के लिए एक प्राचीन आयुर्वेदिक क्रिया। आयुर्वेद वैदिकाचार्य चित्त और मन में संतुलन लाने के लिए यह शक्तिशाली क्रिया है।
कुष्मांडा विशेष होम
संध्याकाल में कुष्मांडा यज्ञ अनुष्ठान किया गया। इसमें मनुष्य द्वारा अपने जीवन में संग्रहित पापों या बुरे कर्मों से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है। पूर्ण विश्वास और भक्ति के साथ किए जाने पर यह होम बुरे कर्मों को शुद्ध करता है। हिंसा, गाय की हत्या, गी-अनुशंसित भोजन खाने, किसी धार्मिक व्यक्ति की हत्या या उसका अपमान करने, विवाहेतर संबंधों, पारंपरिक और आध्यात्मिक मार्गो को छोडने आदि के कारण जमा हुए सभी पापों से छुटकारा पाने के लिए होम किया जाता है। मंत्र कुष्मांडा होम में लोगों द्वारा किए गए कुछ पापों को संबोधित किया जाता है और होम करने पर उन्हें विशेष रूप से इन पापों के दुष्प्रभावों से मुक्त किया जाता है।

उल्लिखित कुछ पाप निम्नांकित है:
देव या पितृ कर्म में लापरवाही या अहंकारी होना।
दैनिक जीवन के कार्यों में झूठ बोलना। दूसरों के पीठ पीछे बुराई या बुराई करना। कोई व्यक्ति अपने गर्भ (गरबा) में रहते हुए माँ को कष्ट पहुंचाता है।
हमारी जानकारी के साथ या उसके चिना कोई व्यक्ति अपने माता-पिता को मानसिक चोट पहुँचाता है। अपने बुजुर्गों, पुराहितों था आचार्यों से बात करते समय अभद्र भाषा का प्रयोग करना।

वन दुर्गा विशेष पूजा अनुष्ठान किया गया। क्योंकि वर्तमान छत्तीसगढ़ में दंडकारण्य की अधिष्ठात्री देवी वनदुर्गा का आह्वान भगवान राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ अपने वनवास के दौरान किया था। भगवान राम ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि उनके भाई भरत अयोध्या छोड़ कर उनकी तलाश में घने जंगल में घूम रहे है। इस चुनौतीपूर्ण यात्रा के दौरान भरत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, भगवान राम ने वन दुर्गा देवी की सहायता मांगी। देवी पवित्र स्थानों और आसपास रहने वाले अन्य आदि देवताओं की रक्षा करके पर्यावरण में संतुलन लाती है। वन देवी, जंगल और प्राकृतिक परिदृश्य की रक्षक हैं।


यह ताकत, जीवन शक्ति प्रदान करती है और कुल वर्धन (अगली पीड़ियों के लिए शक्ति) में मदद करती हैं।6
यह महा पूजा पूरे छत्तीसगढ़ राज्य और इसके वन क्षेत्रों के लिए है, जहां आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे जंगल को संरक्षित और संरक्षित किया जा सकता है।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।