बाल संस्कार शिविर के प्रथम दिवस बच्चों को सिखाए गए व्यक्तित्व विकास, स्वस्थ जीवन और अच्छे संस्कार के पाठ
24 अप्रैल 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में 7 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 24 अप्रैल से 30 अप्रैल तक आयोजित बाल संस्कार शिविर का शुभारंभ अत्यंत उत्साह, उमंग और आध्यात्मिक वातावरण के साथ किया गया। शिविर के प्रथम दिवस बच्चों में संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का विकास करने हेतु विविध प्रेरणादायक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ ही ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की मंगलकामना की गई। इसके पश्चात बच्चों को “ईश्वर अपने साथ है” शीर्षक से सुंदर प्रार्थना सिखाई गई, जिससे बच्चों के मन में आत्मविश्वास, सुरक्षा और ईश्वर के प्रति प्रेम की भावना जागृत हुई। प्रार्थना के दौरान पूरा वातावरण श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।
शिविर में वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके संतोषी दीदी ने बच्चों को “इनर पर्सनालिटी” अर्थात आंतरिक व्यक्तित्व के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जिन्हें हम बदल नहीं सकते, जैसे बीता हुआ समय, दूसरों का स्वभाव या कुछ परिस्थितियाँ। लेकिन बहुत सी ऐसी बातें भी हैं जिन्हें हम बदल सकते हैं, जैसे अपनी सोच, आदतें, व्यवहार, बोलचाल और जीवन जीने का तरीका। यदि हम उन बातों को बदलने का प्रयास करें जिन्हें हम बदल सकते हैं, तो अपने जीवन को सदा के लिए खुशहाल, सफल और सुंदर बना सकते हैं।
उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्ची सुंदरता बाहरी रूप में नहीं, बल्कि अच्छे विचारों, मधुर व्यवहार, अनुशासन, विनम्रता और आत्मविश्वास में होती है। जब बच्चे अपने भीतर सकारात्मक गुण विकसित करते हैं, तब उनका व्यक्तित्व स्वतः आकर्षक बन जाता है। बच्चों ने इस सत्र को बड़े ध्यानपूर्वक सुना और अनेक प्रश्न भी पूछे।
सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने बच्चों को भोजन के महत्व के बारे में सरल एवं प्रेरणादायक तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि हमारे शरीर, मन और बुद्धि को ऊर्जा देने वाला माध्यम है। इसलिए भोजन सदैव शांत मन, प्रसन्नता और कृतज्ञता की भावना से करना चाहिए।
उन्होंने बच्चों को यह भी बताया कि मोबाइल देखते हुए, टीवी देखते हुए या अन्य किसी ध्यान भटकाने वाली गतिविधि के साथ भोजन करने से शरीर को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता। इससे पाचन शक्ति प्रभावित होती है, मन अशांत होता है तथा भोजन का सही स्वाद और पोषण नहीं मिल पाता। इसलिए भोजन करते समय केवल भोजन पर ध्यान देना चाहिए और उसे अच्छी तरह चबा-चबाकर खाना चाहिए।
शिविर के अंत में बच्चों को उत्साहपूर्ण एरोबिक्स अभ्यास भी कराया गया, जिसमें बच्चों ने बड़े आनंद और ऊर्जा के साथ भाग लिया। संगीत की धुन पर किए गए एरोबिक्स से बच्चों में शारीरिक स्फूर्ति, उत्साह और प्रसन्नता का संचार हुआ। पूरे दिन बच्चों के चेहरों पर खुशी, उत्साह और नई सीख की चमक दिखाई दी।
दीदी ने बताया कि शिविर में आगामी दिनों में बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु व्यक्तित्व विकास, राजयोग मेडिटेशन, नैतिक शिक्षा, एकाग्रता अभ्यास, कहानी एवं प्रेरक प्रसंग, रचनात्मक खेल, संस्कार निर्माण, मोबाइल की लत से बचाव, माता-पिता का सम्मान, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, तनावमुक्त जीवन शैली तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाले अनेक रोचक एवं ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सकारात्मक सोच एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाएगी।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
ब्रह्माकुमारीज़, बिलासपुर

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