बिलासपुर के यातायात विभाग प्रतिदिन अपनी वसूली के टारगेट को पूरा करने सुबह से शाम तक पूरी मेहनत करते है हम ऐसा यूं ही नहीं कह रहे हैं बल्कि इसका उदाहरण सोमवार को तिफरा क्षेत्र में देखने को मिला। जब नागपुर से आ रहे एक ड्राइवर ने वसूली के खिलाफ चक्का जाम कर दिया दरअसल ड्राइवर यातायात विभाग के जवानों के वसूली से इतना त्रस्त था कि उसने थक हारकर बिलासपुर रायपुर मुख्य मार्ग तिफरा सब्जी मंडी मोड़ के पास अपनी ट्रक अड़ाकर पूरे मार्ग को जाम कर दिया तकरीबन 2 घंटे तक यह मार्ग जाम रहा इस बीच यातायात विभाग और पुलिस के जवान वहां पहुंच गए और उन्होंने ट्रक ड्राइवर को समझाइया लेकिन ट्रक ड्राइवर वसूली से इतना ट्रस्ट हो चुका था कि वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था

अंततः जब पुलिस के आला अधिकारियों ने ट्रक ड्राइवर को समझाइया उसके बाद वह मान गया और उसने अपने ट्रक को सड़क से हटाया दरअसल ट्रक ड्राइवर का कहना था कि जब वह बिलासपुर सीमा में प्रवेश करना चाहता था तो चकरभाटा के पास यातायात विभाग ने शहर के अंदर वहां के प्रवेश के लिए उस राशि की मांग की उसने राशि दे दी तो उसे ट्रक अंदर लाने दिया गया इसके बाद जब वह और आगे बढ़ा तो फिर अन्य जवानों ने भी उसे रोक लिया और राशि की मांग की उसने फिर राशि दे दी लेकिन जब तीसरी बार उस राशि मांगी गई तो उसका आक्रोश बढ़ गया और उसने इस तरह के घटना को अंजाम दे दिया लेकिन इसमें उसे ट्रक ड्राइवर की भी गलती नहीं है

क्योंकि उसने वसूली से त्रस्त होकर चक्का जाम किया था तो वहीं आसपास के रहे वासियों ने भी ट्रक ड्राइवर के इस साहस को आगे बढ़ते हुए जवानों के खिलाफ जमकर आक्रोश जाहिर किया यह तो एक व्यक्ति ने साहस दिखाया है प्रतिदिन हर ट्रक ड्राइवर को इसी तरह से मुसीबतें झेलनी पड़ती है लेकिन यातायात विभाग के जवान है की वसूली में कोई कोताही नहीं बरतते जाहिर तौर पर इस तरह से अगर और आक्रोश दिखाई देता है तो निश्चित तौर पर वसूली पर लगाम लगाई जा सकती है

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।