शिकायतों के ढेर पर सोया प्रशासन, रास्ता बंद—मोहल्लेवासी परेशान

शिकायतों के ढेर पर सोया प्रशासन, रास्ता बंद—मोहल्लेवासी परेशा
बिलासपुर के नया सरकंडा क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही और कथित दबंगई का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मोहल्लेवासियों के अनुसार, करीब 30–40 वर्षों से उपयोग में आ रहा आम रास्ता अचानक एक व्यक्ति द्वारा बंद कर दिया गया, जिससे पूरे इलाके के लोगों का आवागमन बाधित हो गया है। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामले में बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक कोई कार्रवाई तक नहीं की गई जैसे मानो दंबगई के सामने नतमस्तक हो प्रशासन।
शिकायत पत्र के मुताबिक, यह रास्ता कपिल नगर से लेकर लक्ष्मीनारायण सोनी के घर तक तथा आगे मन्नू मानिकपुरी के घर तक रिकॉर्ड में भी दर्ज है नगर निगम द्वारा वर्षों पहले सी.सी. रोड के रूप में विकसित किया गया था। इसके बावजूद अजीत सिंह ठाकुर और विजय सोमवासी नामक व्यक्ति द्वारा रास्ते को बंद कर दिया गया, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मोहल्लेवासियों ने कलेक्टर को दिए आवेदन में स्पष्ट रूप से बताया है कि यह रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज है, और उसका सीमांकन कॉपी है फिर भी इसे जबरन बंद कर दिया गया। सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस मार्ग के बंद होने से आपातकालीन सेवाएं जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड का आवागमन भी प्रभावित हो सकता है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर से लेकर नगर निगम आयुक्त तक, यहां तक कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक-मंत्रियों तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं से भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हर जगह सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।
इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या आम जनता की समस्याएं अब सिर्फ फाइलों में दबकर रह जाएंगी? क्या रसूखदार लोगों के सामने प्रशासन पूरी तरह बेबस हो चुका है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन पूरी तरह लापरवाह हो चुका है और आम जनता की समस्याओं को लेकर कोई संवेदनशीलता नहीं बची है। एक छोटे से रास्ते को खुलवाने के लिए महीनों से चक्कर काट रहे लोगों की सुनवाई नहीं होना, सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
मोहल्लेवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रास्ता नहीं खुलवाया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता है या फिर जनता को सड़कों पर उतरने के लिए छोड़ देता है। और इस आंदोलन में यदि कोई भी अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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