बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) में दिनांक 26 जनवरी, 2024 को 75वें गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के समीप स्थित प्रांगण में किया गया। जहां माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने विद्यार्थियों को सौगत देते हुए ‘गुरु घासीदास विश्वविद्यालय स्वाभिमान थाली'(जीएसटी) की संख्या को 500 से बढ़ाकर प्रतिदिन 1000 थाली करने की घोषणा की। गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय देश का एकमात्र ऐसा उच्च शिक्षण संस्थान है जहां छात्र-छात्राओं का, छात्र-छात्राओं के द्वारा, छात्र-छात्राओं के लिए ‘गुरु घासीदास विश्वविद्यालय स्वाभिमान थाली'(जीएसटी) जैसा प्रकल्प चल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का एक मात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के अपने गुरुत्तर दायित्व के निर्वहन के क्रम में विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि व उनके सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए सामाजिक एवं स्थानीय आश्यकताओं के अनुरूप यह पहल की गई है।
कुलपति प्रो. चक्रवाल ने कहा कि एक वर्ष पूर्व 200 विद्यार्थियों से प्रारंभ हुई इस पहल ने अब 1000 थाली के आंकड़े को छू लिया है। हमारा लक्ष्य भविष्य में सभी विद्यार्थियों को स्वाभिमान थाली को उपलब्ध कराना है।उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों में स्वाभिमान थाली’ की सफलता और विद्यार्थियों के समग्र प्रयासों की चर्चा होती है। स्वच्छ भारत, स्वथ्य भारत की दिशा में प्रारंभ हुई इस योजना में विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े स्वयंसेवकों की अहम भूमिका है।
75वें गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के समीप स्थित प्रांगण में किया गया है। जहां माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने राष्ट्रीय ध्वज को फहराया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मनीष कुमार श्रीवास्तव एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. शैलेंद्र कुमार उपस्थित रहे।
इस अवसर अपने उदबोधन में माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने सभी उपस्थित जनों को 75वें गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि युवा स्वावलंबी बनें तथा समय व्यर्थ न करते हुए भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान प्रदान करें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय का नैक मूल्यांकन होने जा रहा है जो विश्वविद्यालय को श्रेष्ठ रैंकिंग के साथ राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करेगा, इस हेतु सभी अपना सक्रिय एवं समन्वित सहयोग प्रदान करें।


कुलपति प्रो. चक्रवाल ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का एक ही मूल मंत्र है कि सभी अपने-अपने दायित्वों एवं कर्तवयों का पूर्ण समर्पण के साथ निर्वहन करें। भारत की आजादी में जनजातियों का महत्वपूर्ण योगदान है। जिन्हें हमें याद रखना होगा। शहीद वीर नारायण से लेकर महायोद्धा टंटया भील के अप्रितम बलिदान को नई पीढ़ी को याद रखना होगा।
इससे पूर्व माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल एवं कुलसचिव प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने संत गुरू घासीदास जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। तत्पश्चात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। इस अवसर पर माननीय कुलपति महोदय ने एनसीसी, एनएसएस और सुरक्षा प्रहरियों के मार्च पास्ट का अवलोकन किया एवं सलामी ली। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. शैलेन्द्र कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्यापीठों के अधिष्ठातागण, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
दानदाताओं के सहयोग से संचालित है ‘गुरु घासीदास विश्वविद्यालय स्वाभिमान थाली'(जीएसटी)
इस योजना का प्रारंभ विश्वविद्यालय द्वारा समाज की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से हो रहा है। सभी से इस पुनीत कार्य में सहयोग की अपेक्षा है। जो भी माननीय दानदाता इसमें सहयोग करना चाहते हैं वे ‘गुरु घासीदास विश्वविद्यालय स्वाभिमान थाली'(जीएसटी) के समन्वयक डॉ. दिलीप झा, सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र विभाग से फोन नंबर 9926003033 पर संपर्क कर सकते हैं।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।