बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के टेकनालॉजी इनेबलिंग सेंटर (टीईसी) जो भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से वित्तीय सहायता प्राप्त है द्वारा दो दिवसीय (18-19 मार्च) राष्ट्रीय जीजीवी आइडियाथॉन- 2024 का आयोजन किया गया है। दिनांक 18 मार्च, 2024 को सुबह 11 बजे रजत जयंती सभागार में उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम सागर मिश्रा, चेयरमैन व प्रबंध निदेशक दक्षिण पूर्व कोलफील्ड लिमिटेड बिलासपुर ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आवश्यकता अविष्कार की जननी है। उद्देश्य के बिना लक्ष्य को प्राप्त करना मुश्किल है। जब तक लक्ष्य निर्धारित नहीं होगा तब तक मति और गति नहीं बन सकती। किसी भी नवाचार एवं नवसृजन के लिए लक्ष्य से प्रेम आवश्यक है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. चक्रवाल ने कहा कि युवा नये विचारों की खान हैं जिसके माध्यम से वे नई इबारत लिख सकते हैं। इस देश का युवा असीम संभावनवाओं से भरा हुआ है जो 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। नये विचारों को ऊर्जा प्रदान करने में आइडियाथॉन 2024 की अहम भूमिका है।
कुलपति प्रो. चक्रवाल ने कहा कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में युवाओं के नये विचारों को साकार करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है ताकि युवा पंख फैलाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर उद्यमिताशीलता के साथ मानवीय सरोकारों से जुड़े अविष्कारों का मानक स्थापित कर सकें।
विशिष्ट अतिथि श्री एस.एस. बजाज, महानिदेशक छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद रायपुर ने कहा कि नवीन अविष्कारों एवं प्रयोगों से विकसित राष्ट्र का निर्माण होगा। आइडियाथॉन-2024 में भाग लेने वाले प्रतिभागी तथा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के लिए सीजीकॉस्ट सदैव सहयोग एवं समन्वय के लिए तैयार है। इससे पूर्व प्रारंभ में मंचस्थ अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन कर मां सरस्वती एवं बाबा गुरु घासीदास जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये। तत्पश्चात, अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। तंरग बैंड द्वारा सरस्वती वंदना एवं कुलगीत की प्रस्तुति दी गई। स्वागत उद्बोधन कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. अमित कुमार खासकलम ने दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक प्रो. आलोक कुमार सिंह कुशवाहा ने आइडियाथॉन-2024 के विषय में जानकारी प्रदान की।


अतिथियों को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल भेंट कर सम्मान किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मनीष श्रीवास्तव एवं संचालन डॉ. प्रिंसी मतलानी ने किया। इस अवसर पर स्मार्ट सिटी बिलासपुर के मुख्य प्रबंधक कैप्टन वाई श्रीनिवास, श्री विष्णु वैभव द्विवेदी, सीटीओ इनोवेशन एंड टेकनालॉजी आईआईटी भिलाई के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से आए 150 से ज्यादा प्रतिभागियों, विभिन्न विद्यापीठों के अधिष्ठातागण, विभागाध्यक्षगण, शिक्षकगण, अधिकारीगण तथा शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
बैंबू क्राफ्ट पर चार दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
कार्यशाला के शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल तथा विशिष्ट के रूप में प्रधान मुख्य वनसंरक्षक श्री राजू अगासीमनी रहे। विद्यार्थियों के कौशल विकास हेतु चार दिवसीय बाम्बू क्राफ्ट वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के 100 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय प्रो. चक्रवाल ने सभी को शुभकामनायेँ प्रेषित करते हुए कहा कि वानिकी विभाग नित नये आयाम स्थापित कर रहा है। आप सभी अपने अंदर की ऊर्जा को इसी प्रकार सकरात्मक व कलात्मक कार्यों में लगाएं।
श्री राजू अगासीमनी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि हमें सतत विकास की ओर अग्रसर होना जरूरी है। सरकार वन विभाग की ओर से कई योजनाएं चला रही है. उन्होंने कई योजनाओं का उल्लेख करते हुए उनके लाभ के बारे में विस्तार से बताया। कार्यशाला की संयोजक डॉ. भावना दीक्षित एवं डॉ. गुंजन पाटिल हैं। इससे पूर्व स्वागत उद्बोधन प्राकृतिक संसाधन विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. एस.सी. तिवारी ने तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रो. के.के. चंद्रा ने दिया।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।