रतनपुर से युनुस मेनन

छत्तीसगढ़ की प्राचीन राजधानी रतनपुर जहां राजा महाराजाओं के समय से जो स्वर्णिम परंपराएं विकसित हुई थी उसका जीवंत रूप आज भी यहां देखने को मिलता है। उनमें से एक है रतनपुर का ऐतिहासिक माघी पूर्णिमा आदिवासी विकास मेला। सप्ताह भर तक चलने वाले इस मेले की शुरुआत 24 फरवरी से हुई थी और सात दिनों तक इंद्रधनुषी छटा बिखेरती इस मेले के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छ. ग शासन के उप मुख्यमंत्री अरुण साव व विशिष्ट अतिथि बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

रतनपुर मांघी पूर्णिमा प्रशासनिक मेले में पहुंचे अतिथियों का मेला परिसर में भव्य आतिशी स्वागत किया गया।उसके बाद उपमुख्यमंत्री श्री साव द्वारा माँ महामाया व छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया गया,तत्पश्यात न.पा अधिकारी, एच डी रात्रे, न.पा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के द्वारा उप मुख्यमंत्री अरुण साव को शाल,श्रीफल,कांसे का लोटा तथा पारंपरिक मेले का उखरा प्रसाद और मेले का प्रतीक चिन्ह के रूप में लकड़ी का तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया।

ऐतिहासिक माघी पूर्णिमा आदिवासी विकास मेले से समापन के अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम सब का सौभाग्य है कि आज एक आदिवासी समाज की बेटी एक राष्ट्रपति के रुप में देश का नेतृत्व कर रही है, जो कि आदिवासी समाज के उत्थान का संकेत है। इसके अलावा उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजनाओं के व जनता को मिल रहे लाभ के बारे में बतलाया। और अंत मे मेला परिसर में विभिन्न विभागों के द्वारा स्टाल लगाने वालों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।