पोलियो मुक्त देश – डी पी विप्र की पहल

बिलासपुर, छत्तीसगढ़। स्वस्थ एवं सशक्त भारत के निर्माण के संकल्प को साकार करने तथा देश को पूर्णतः पोलियो मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत डी.पी. विप्र महाविद्यालय, बिलासपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की दोनों इकाइयों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गांधी चौक, बिलासपुर में व्यापक जनसहभागिता के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। सेवा, समर्पण, अनुशासन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से ओत-प्रोत स्वयंसेवकों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महाविद्यालय के उपप्राचार्य डॉ. एम. एस. तंबोली एवं डॉ. मनोज सिंहा समन्वयक अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस सामाजिक सेवा कार्यक्रम में श्री अविनाश सेठी, डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. किरण दुबे, डॉ. आभा तिवारी, प्रो. युपेश कुमार, प्रो. विभांशु अवस्थी तथा प्रो. हेल्सियन कांत की सहभागिता रही। सभी प्राध्यापकों ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए समाज सेवा, जनस्वास्थ्य और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की तथा उन्हें भविष्य में भी इसी प्रकार सेवा कार्यों में अग्रणी रहने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान विश्व के सबसे बड़े जनस्वास्थ्य अभियानों में से एक है, जिसका उद्देश्य पाँच वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की जीवनरक्षक खुराक उपलब्ध कराना है ताकि कोई भी बच्चा इस गंभीर एवं स्थायी विकलांगता का शिकार न हो। इस अभियान में डी.पी. विप्र महाविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवकों ने पोलियो बूथ पर आने वाले बच्चों एवं उनके अभिभावकों का स्वागत किया, पंजीयन कार्य में सहयोग दिया, कतार व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखा तथा स्वास्थ्य कर्मियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की दो बूंदें पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वयंसेवकों ने केवल बूथ पर अपनी सेवाएँ ही नहीं दीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान भी चलाया। उन्होंने नागरिकों को बताया कि प्रत्येक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में पाँच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलानी चाहिए, चाहे उन्हें पूर्व में कई बार यह खुराक मिल चुकी हो। स्वयंसेवकों ने अभिभावकों को नियमित टीकाकरण, बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण तथा स्वच्छता के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यह संदेश दिया कि स्वस्थ बचपन ही विकसित समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।

अभियान के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों नंदिनी शर्मा, श्वेता कौशिक, प्राप्ति पाण्डेय, ऋद्धि टंडन, आँचल खांडेकर, सुमन एवं उन्नति पाण्डेय ने अत्यंत समर्पण एवं अनुशासन के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। स्वयंसेवकों ने छोटे बच्चों एवं उनके अभिभावकों को सहज वातावरण प्रदान करते हुए स्वास्थ्य विभाग के कार्य को गति दी। उनकी सक्रियता, सेवा भावना और टीमवर्क ने अभियान को अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस अवसर पर उपस्थित प्राध्यापकों ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का ध्येय वाक्य “Not Me But You” केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज सेवा की जीवंत भावना है। एनएसएस विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय संवेदनशीलता तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का विकास करती है। इसी उद्देश्य को लेकर डी.पी. विप्र महाविद्यालय की एनएसएस इकाइयाँ वर्षों से रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, मतदाता जागरूकता, सड़क सुरक्षा, नशा मुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं सामाजिक अभियानों में निरंतर सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं l शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का विकास करना भी उनका प्रमुख दायित्व है। उन्होंने कहा कि पल्स पोलियो जैसे राष्ट्रीय अभियान तभी पूर्णतः सफल हो सकते हैं जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें सक्रिय सहयोग प्रदान करे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गांधी चौक की समस्त टीम तथा एनएसएस स्वयंसेवकों के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। ऐसे अभियान विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना एवं सामाजिक समरसता का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के युवा यदि जनस्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता के अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाएँ तो देश को अनेक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम के समापन पर स्वास्थ्य विभाग एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गांधी चौक के समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। महाविद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी डी.पी. विप्र महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयाँ जनहित एवं राष्ट्रहित के प्रत्येक अभियान में इसी प्रकार सक्रिय एवं प्रभावी सहभागिता निभाती रहेंगी।

महाविद्यालय परिवार ने अंत में समस्त नागरिकों से अपील की कि वे प्रत्येक राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें तथा पाँच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की जीवनरक्षक “दो बूंद ज़िंदगी की” अवश्य पिलाएँ। एक स्वस्थ, जागरूक और सुरक्षित बचपन ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति है, और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए डी.पी. विप्र महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना सदैव समाज के साथ खड़ी है।

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