कोल इंडिया से 7 स्वतंत्र निदेशकगणों ने किया गेवरा एवं कुसमुंडा खदान का दौरा, मुख्यालय में ली समीक्षा बैठक

कोल इंडिया लिमिटेड से स्वतंत्र निदेशकगण श्री दिनेश सिंह, श्री जी. नागेश्वर राव, श्री बी राजेश चंदर, श्री पूनंभाई कलाभाई मकवाना, श्री कामेश कांत आचार्य, श्री अरुण कुमार उरांव, एवं श्री घनश्याम सिंह राठौर दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन कल दिनांक 23/12/2023 को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर पहुंचे जहां सीएमडी डॉ प्रेम सागर मिश्रा एवं एसईसीएल निदेशक मण्डल ने उनका आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यालय में आज निदेशकगणों द्वारा एक समीक्षा बैठक में भाग लिया गया। बैठक में एसईसीएल टीम द्वारा एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से कंपनी की उत्पादन-उत्पादकता, पिछले वित्तीय वर्ष की उपलब्धियां, इस वित्तीय वर्ष में कोयला उत्पादन, डिस्पैच, ओबीआर एवं पहली छमाही के नतीजे, भू-अधिग्रहण, पर्यावरण, सीएसआर, रेल कॉरिडोर, एफ़एमसी आदि विषयों के बारे में बताया गया।

देश की सबसे बड़ी गेवरा खदान तथा कुसमुंडा मेगा प्रोजेक्ट में खनन गतिविधियों का लिया जायज़ा

इससे पहले दौरे के पहले दिन कल निदेशकगणों द्वारा एसईसीएल की गेवरा एवं कुसमुंडा खदानों में खनन गतिविधियों का जायजा लिया गया। सबसे पहले निदेशकगण गेवरा पहुंचे एवं कोयला खनन गतिविधियों का नज़दीकी से जायजा लिया। खदान में निदेशकगणों द्वारा कोल फेस तक पहुंचकर वर्टीकल रीपर का संचालन एवं किस तरह बिना किसी ब्लास्टिंग के कोयला खनन किया जाता है यह देखा। ओबीआर गतिविधियों का जायज़ा लेते हुए उन्होनें 42 क्यूबिक मीटर शोवेल एवं 240 टन डंपर का किस प्रकार संचालन किया जाता है इसके बारे में जाना। गेवरा खदान के निरीक्षण से पहले सभी स्वतंत्र निदेशकगणों द्वारा आम्र कानन में वृक्षारोपण किया गया।

गेवरा भ्रमण के पश्चात सभी निदेशकगणों ने कुसमुंडा खदान का दौरा किया तथा व्यू पॉइंट पहुँच कर माइन प्लान के ज़रिए खदान की संचालन गतिविधियों के बारे में जाना। कुसमुंडा टीम द्वारा एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से सभी निदेशकगणों को खदान की उत्पादन-उत्पादकता के बारे में अवगत कराया।

दौरे पर एसईसीएल से निदेशक (तकनीकी सह योजना/परियोजना) श्री एस एन कापरी, निदेशक (वित्त) श्री जी श्रीनिवासन एवं निदेशक (कार्मिक) श्री देबाशीष आचार्या स्वतन्त्र निदेशकों के साथ रहे।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।