ट्रैफिक तोड़ने वाले सावधान,अब ई चालान पहुंचेगा घर,कलेक्टर ने शीघ्र शुरू करने के दिए निर्देश

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से इंटीग्रेटेड हुई चालान की प्रक्रिया,कल से टेस्टिंग शुरू

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पहुंचे कलेक्टर,संचालन का लिया जायजा

कलेक्टर ने कहा ट्रैफिक और सुरक्षा की दृष्टी से यह काफी अहम और उपयोगी है सेंटर
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दो से तीन दिन के भीतर शुरू होगा ई चालान,अभी मैनुअल चालान किया जा रहा*

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को आगे के चौक में पकड़े

बिलासपुर- ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले हो जाएं सावधान,क्योंकि ई चालान सीधे पहुंचेगा घर। आईटीएमएस प्रोजेक्ट के तहत ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले कैमरे में हो रहे ट्रेस जिन्हें ई चालान भेजा जाएगा। अब तक एनआईसी से इंटीग्रेटेड नहीं होने के कारण ई चालान की कार्रवाई रूकी हुई थी पर अब कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से इंटीग्रेटेड हो जाने के बाद कल से टेस्टिंग प्रारंभ कर दी जाएगी। आज कलेक्टर श्री अवनीश शरण ने एमडी श्री कुणाल दुदावत के साथ कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का मुआयना कर सेंटर और आईटीएमएस की पूरी कार्यप्रणाली व संचालन को देखा। इस दौरान कलेक्टर श्री शरण कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में लगे स्क्रीन के ज़रिए पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों को ई चालान की कार्रवाई जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर श्री अवनीश शरण ने आज स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत संचालित आईटीएमएस प्रोजेक्ट और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पहुंचे,जहां संचालन टीम ने कंट्रोल सेंटर के द्वारा किए जाने वाले कार्यों को विस्तार से बताया। सेंटर में लगे स्क्रीन के ज़रिए कलेक्टर ने चौक चौराहों की ट्रैफिक व्यवस्था को भी देखा,इस दौरान ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करने वालों को आगे के चौक में पकड़कर चालानी कार्रवाई करने के निर्देश दिए,इसके लिए कैमरे में ट्रैस हुए व्यक्ति की जानकारी आगे आने वाले चौक के पब्लिक एड्रेस सिस्टम में एनाउंस कर तैनात पुलिस कर्मी को देने के निर्देश ट्रैफिक विभाग को दिए साथ ही ई चालान की कार्रवाई शीघ्र शुरू करने को भी कहा,ताकि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन ना हो।

रोजाना लगभग 90 हजार लोग ट्रैफिक का करते है उल्लंघन,ई चालान से आएगी कमी

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के ज़रिए की जा रही निगरानी और आधुनिक तकनीक से शहर में रोजाना 90 हजार लोग औसतन ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते पाए जा रहे हैं। अब ई चालान की कार्रवाई शुरू होने से इस पर कमी आने की उम्मीद है।

नागरिकों और पुलिस को मिली है मदद

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बिलासपुर में संचालित इंटेलिजेंट ट्रैफिक एंड मैनेजमेंट सिस्टम से पूरा शहर सुरक्षा के घेरे में आ चुका है। इससे पुलिस को जहां ट्रैफिक समेत अन्य अपराधिक मामलों को सुलझाने में आसानी हो रही है तो वहीं नागरिकों को इससे काफी मदद मिल रही है।

पहला केस- 21 सितंबर को सुबह 9 बजे तिफरा से आटो पकड़कर मंदिर चौक आई ज्योति सुर्यवंशी का बैग आटो में ही छूट गया था,जिसमें कपड़े और पैसे थे । सिविल लाइन थाने में सूचना देने पर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के ज़रिए आटो को ट्रैस कर छूटे हुए सामान को बरामद किया गया।

दूसरा केस- 21 सितंबर को ही आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर भगवान सिंह का बैग धोखे से कोई दूसरा व्यक्ति रेलवे स्टेशन से ले गया था, स्टेशन के बाहर लगे कैमरे के वीडियों फुटेज में तस्वीर साफ नहीं थी। जिसके बाद सब इंस्पेक्टर ने कमांड सेंटर में संपर्क किया, सेंटर में मौजूद एएनपीआर सिस्टम से नंबर प्लेट स्पष्ट दिखने लगा जिसके बाद ट्रैस करके देवकीनंदन चौक में उक्त बैग की बरामदगी की गई।

तीसरा केस- तोरवा में रहने वाले सतीश कुमार व्यास का है,जिनका मोबाइल सीएमडी चौक में गिर गया था। थाने के ज़रिए कमांड एंड कंट्रोल में संपर्क करने पर मोबाइल को उठाने वाले व्यक्ति की पहचान उसके गाड़ी से की गई,घटना के तीन दिन बाद सतीश कुमार व्यास को गुम हुआ मोबाइल मिल गया।

चौथा केस-मगरपारा में रहने वाले व्यावसायी मिर्जा नदीम बेग के बड़े भाई को 21 सितंबर को दोपहर में सिविल लाइन थाना के पास अज्ञात चारपहिया वाहन ने ठोंकर मार दिया था। घटना के बाद आरोपी वाहन लेकर फरार हो गया था। छोटे भाई मिर्जा नदीम बेग की शिकायत के बाद पुलिस ने कमांड सेंटर के कैमरे के ज़रिए वाहन का पता लगाया और आरोपी और वाहन को थाने में लाकर कानूनी कार्रवाई की गई।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।