

पृथ्वी को स्वर्ग बनाने की शुरुआत हमारे संकल्पों से होती है — बीके स्वाति दीदी
22 अप्रैल 2026, बिलासपुर। पृथ्वी केवल एक भौतिक ग्रह नहीं, बल्कि हमारी जीवनदाता माता है। आज मानव के असंतुलित जीवनशैली और नकारात्मक सोच के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बाहरी प्रदूषण के साथ-साथ मन का प्रदूषण भी पृथ्वी के संकट का मुख्य कारण है। जब तक हम अपने विचारों को शुद्ध और सकारात्मक नहीं बनाएंगे, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में पृथ्वी दिवस के पावन अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा। दीदी ने आगे कहा कि राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से हम अपने भीतर की शांति और शक्ति को जागृत कर सकते हैं और वही ऊर्जा हम प्रकृति को भी दे सकते हैं। यह समय है कि हम केवल पर्यावरण संरक्षण के भौतिक उपायों तक सीमित न रहें, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से भी पृथ्वी के कल्याण में योगदान दें। हर व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में कुछ समय निकालकर पृथ्वी के लिए शुभ संकल्प अवश्य करना चाहिए। पृथ्वी को स्वर्ग बनाने की शुरुआत हमारे शुभ संकल्पों से होती है। साथ ही, अपने व्यवहार में सादगी, संयम और संतुलन लाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना चाहिए।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके संतोषी दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पृथ्वी को सबसे अधिक आवश्यकता है सकारात्मक सोच और पवित्र भावनाओं की। जब हम सभी मिलकर एकजुट होकर शांति, प्रेम और शक्ति के संकल्प करते हैं, तो वह ऊर्जा वातावरण को शुद्ध करती है और प्रकृति में संतुलन स्थापित करने में सहायक बनती है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित भाई-बहनों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरते हुए, सभी ने एक सुंदर गोल घेरा बनाकर पृथ्वी माता के प्रति अपनी शुभ भावनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान सामूहिक रूप से राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया, जिसमें सभी ने अपने मन से पवित्र संकल्पों द्वारा पृथ्वी को सुख, शांति और शक्ति की सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर


