बिलासपुर -:- शिक्षा विभाग में पदोन्नति संशोधन के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि हाईकोर्ट और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत गुपचुप तरीके से जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव ने शिक्षकों को प्रधान पाठक पद पर पदस्थापित कर दिया गया। पूरे मामले की शिकायत दस्तावेजों के साथ कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कलेक्टर और कमिश्नर से की है।

मामले में दावा किया गया है कि 27 दिसंबर 2024 को तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी टी.आर. साहू द्वारा सहायक शिक्षकों को प्रधान पाठक पद पर पदोन्नति दी गई थी, जो 29 मार्च 2023 के विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप थी। बाद में कुछ शिक्षकों ने पदस्थापना को लेकर आपत्ति दर्ज कर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। 16 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को DPI के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद DPI ने 4 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर अभ्यावेदन को अमान्य कर दिया और पूर्व निर्देशों के अनुसार ही पदस्थापना करने को कहा।

यहीं से शुरू हुआ खेल

आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने न्यायालय और DPI के आदेशों की अनदेखी करते हुए संबंधित शिक्षकों की पदस्थापना उनके मनचाहे स्थानों पर कर दी। उदाहरण के तौर हलधर साहू को खोगसरा के बजाय राजेंद्र नगर में पोस्टिंग दी गई,शिप्रा बघेल को मस्तूरी की जगह पौसरा में पदस्थापित किया गया,सूरज कुमार सोनी को तखतपुर के बजाय बिल्हा में पदस्थापना दी गई। इसी तरह अन्य मामलों में भी कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर शहरी या सुविधाजनक स्थानों पर पोस्टिंग दी गई।

कोटा ब्लॉक से शुरू हुआ दूसरा दौर

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पांच शिक्षकों की पदस्थापना के बाद संशोधित आदेश जारी कर कोटा विकासखंड के अन्य शिक्षकों को भी इसी तर्ज पर पदस्थापित किया गया। जबकि 2024 के आदेश में स्पष्ट था कि 10 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर पदस्थापना स्वतः निरस्त मानी जाएगी।

वेटिंग लिस्ट से भी बना दिए प्रधान पाठक

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि करीब तीन साल बाद वेटिंग लिस्ट के शिक्षकों को भी नियम विरुद्ध तरीके से पदोन्नत कर दिया गया। इसके लिए नई DPC कमेटी गठित कर पांच शिक्षकों टकेश्वर जगत,आस्था गौरहा,फुलेश सिंह,हेमलता पटेल,ईश्वरी ध्रुव को प्रधान पाठक बनाते हुए शहर के स्कूलों में पदस्थापना दे दी गई।

अवमानना का दावा भी सवालों के घेरे में

मीडिया में अवमानना के डर का हवाला दिया जा रहा है,जबकि शिकायत के अनुसार DPI द्वारा अभ्यावेदन निरस्त किए जाने के बाद न्यायालय के आदेश का पालन हो चुका था। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा कथित रूप से पूरी प्रक्रिया को मोड़ दिया गया।

जांच की मांग तेज

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर लेन-देन और नियमों की अनदेखी का मामला है।अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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