जिला कार्यालय के सभाकक्ष में अरपा रिवाईवल कमेटी की बैठक आयोजित की गई। अरपा के पुनर्जीवन के संबंध में हाई कोर्ट में दाखिल पीआईएल के बाद कार्यों में आई प्रगति की समीक्षा की गई। जीपीएम कलेक्टर श्रीमती लीना मण्डावी, निगम आयुक्त अमित कुमार एवं भिलाई आईआईटी के निदेशक सहित याचिका कर्ता श्री अरविन्द कुमार शुक्ला, न्यायमित्र आशुतोष कछवाहा, इकोलॉजिस्ट डॉ. नीरज तिवारी, अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता एवं जिला कलेक्टर द्वारा गठित उप समिति के सदस्य शामिल हुए।


बैठक में मुख्य चर्चा आईआईटी भिलाई द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुतिकरण तथा अरपा नदी में आईआईटी द्वारा किये जा सकने वाले सर्वे कार्य को प्रारंभ करने एवं विश्लेषित करने पर रहा। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने बैठक में प्रस्ताव दिया कि आईआईटी के रिसर्च स्कॉलरों की अरपा नदी के भौतिक सर्वे से पूर्व मुख्य परिस्थितियों से उन्हें अवगत कराया जाये और नदी की विभिन्न समस्याओं तथा विभागीय कार्यो, जिसे पहले ही कार्य-योजना में शामिल कर लिया गया है,उन कार्यों के विश्लेषण एवं मूल्यांकन संबंधी सुझाव प्रदान किये जाएं।

इकोलॉजिस्ट डॉ. नीरज तिवारी की ओर से वानिकी एवं कलेक्टर द्वारा स्थापित उप समितियों द्वारा प्रदत्त सभी जानकारियों को एकीकृत कर आईआईटी के भौतिक सर्वेक्षण जो कि लाईडर सर्वे होगा, से विस्तृत परियोजना प्राक्कलन तैयार किया जाए और मूलतः नदी के उद्गम स्थल का भूमि अधिग्रहण कर यथाशीघ्र प्रशासकीय रूपरेखा तैयार किया जाये। अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री आरके गुप्ता द्वारा आने वाले 26 जून को न्यायालय में प्रस्तुत करने वाले दस्तावेज तैयार करने का सुझाव दिया। जीपीएम कलेक्टर श्रीमती लीना मण्डावी द्वारा जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को प्राथमिकता से किये जाने की जानकारी दी गई। इस क्रम में समिति अगले सप्ताह अरपा उद्गम स्थल का दौरा करने का निर्णय भी लिया गया।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।