

बीके स्वाति दीदी ने बच्चों को सिखाया विचारों का रहस्य: “जैसा सोचेंगे, वैसा बनेंगे”
25 अप्रैल 2026, बिलासपुर।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित बाल संस्कार शिविर का दूसरा दिन अत्यंत प्रेरणादायी, शिक्षाप्रद एवं आनंदमय वातावरण में संपन्न हुआ। शिविर में बड़ी संख्या में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जीवन को सुंदर बनाने वाले संस्कारों को सरल व रोचक तरीकों से समझा।
शिविर के दूसरे दिन का मुख्य विषय “विचारों का महत्व” रहा। सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए बहुत ही सरल और प्रभावशाली शब्दों में बताया कि “As you think, so you become” अर्थात हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। उन्होंने बच्चों को समझाया कि अच्छे विचार जीवन को उज्ज्वल बनाते हैं और नकारात्मक विचार हमें कमजोर बना देते हैं। जिस प्रकार एक छोटा-सा बीज जब धरती में बोया जाता है तो समय के साथ वही बीज विशाल वृक्ष बनकर अनेक फलों और फसलों का कारण बनता है, उसी प्रकार हमारे मन में आने वाला एक छोटा-सा विचार भी हमारे पूरे जीवन को दिशा देता है। अच्छा विचार बोने से अच्छे संस्कार, अच्छे कर्म और सुखद परिणाम प्राप्त होते हैं, जबकि नकारात्मक विचार धीरे-धीरे दुख और असंतोष का कारण बन जाते हैं। इसलिए हमें अपने मन की भूमि को साफ रखकर उसमें शांति, प्रेम और आत्मविश्वास के श्रेष्ठ विचारों के बीज बोने चाहिए, ताकि हमारा जीवन खुशहाल, सफल और संतुलित बन सके।
इसके पश्चात बीके संतोषी दीदी ने आत्मा और शरीर के गूढ़ रहस्य को बच्चों के लिए बेहद रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कंप्यूटर का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारा शरीर हार्डवेयर की तरह है, आत्मा ऑपरेटर है और संस्कार सॉफ्टवेयर के समान हैं। जैसे कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर सही हो तो मशीन अच्छे से काम करती है, वैसे ही यदि हमारे संस्कार अच्छे हों तो हमारा जीवन भी सुचारू और सुखद बनता है। इस उदाहरण को सुनकर बच्चों ने आत्मा की शक्ति और संस्कारों के महत्व को सहजता से समझा।
कार्यक्रम के दौरान बीके अंजू दुआ ने संस्था का परिचय देते हुए ब्रह्माकुमारीज़ के उद्देश्य, कार्य और सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संस्था आत्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों और विश्व शांति के लिए कार्य करती है तथा बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए राजयोग के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाने का मार्ग दिखाती है।
शिविर को और अधिक आनंदमय बनाने के लिए अनामिका टांक द्वारा बच्चों को हैंडीक्राफ्ट बनाना सिखाया गया। बच्चों ने पेपर, धागे और अन्य सामग्रियों से सुंदर रचनाएँ बनाईं। इस गतिविधि से बच्चों की रचनात्मकता, एकाग्रता और धैर्य का विकास हुआ तथा उन्हें सीखने के साथ-साथ आनंद भी मिला।
शारीरिक स्फूर्ति और ऊर्जा के लिए बीके परमानंद भाई ने बच्चों को सरल और उपयोगी व्यायाम कराए। व्यायाम के दौरान बच्चों में उत्साह और ताजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्हें यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ शरीर और शांत मन दोनों जीवन के लिए आवश्यक हैं।
पूरा शिविर प्रेम, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। बच्चों के चेहरों पर सीखने की जिज्ञासा और खुशी साफ झलक रही थी। अभिभावकों ने भी शिविर की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के संस्कार शिविर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ईश्वरीय सेवा में
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर


