


पृथ्वी के लिए वृक्ष आवश्यक – डॉ. अंजू शुक्ला
विश्व पृथ्वी दिवस पर एन.एस.एस. डी.पी. विप्र महाविद्यालय, बिलासपुर द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता एवं व्यापक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन
विश्व पृथ्वी दिवस के पावन अवसर पर किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित न होकर युवाओं एवं समाज के भीतर पर्यावरण संरक्षण के प्रति गहरी संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सक्रिय भागीदारी की भावना को विकसित करना था। महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों, स्वयंसेवकों एवं शिक्षकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने इसे एक सशक्त जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से पृथ्वी की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। चित्रों में जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट, प्लास्टिक प्रदूषण, वनों की कटाई और जैव विविधता के क्षरण जैसे गंभीर मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया। कई चित्रों में पृथ्वी को एक जीवित इकाई के रूप में दर्शाते हुए यह संदेश दिया गया कि यदि हम आज इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संकट में पड़ सकता है। प्रतिभागियों की कलाकृतियों में न केवल कलात्मक सुंदरता थी, बल्कि एक गहरा सामाजिक संदेश भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा था।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य महोदय डॉ. अंजू शुक्ला , उप प्राचार्य डॉ. एम एस तंबोली, श्री अविनाश सेठी, डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. आभा तिवारी, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. किरण दुबे, प्रो. यूपेश कुमार, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. निधिश चौबे , प्रो. ए श्री राम एनएसएस कार्यक्रम सहायक अधिकारी प्रो. आकांक्षा गौतम, प्रो. हेल्सियन कांत के मार्गदर्शन में किया गया। पृथ्वी केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि समस्त जीव-जगत का आधार है और इसका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा यदि जागरूक और जिम्मेदार बनता है, तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। उनके विचारों ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों को प्रेरित किया और उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को और अधिक सशक्त किया।
इस अवसर पर एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा चलाया गया जागरूकता अभियान कार्यक्रम की विशेष पहचान बनकर उभरा। स्वयंसेवकों ने न केवल महाविद्यालय परिसर में, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संदेशों का प्रसार किया। उन्होंने आम लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे हमें अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। लोगों को प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया तथा कपड़े के थैलों के उपयोग, जल की बचत, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।
जागरूकता अभियान के दौरान यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में थोड़ी सी सावधानी बरते, जैसे कि अनावश्यक जल व्यर्थ न करना, पेड़-पौधों की देखभाल करना, प्लास्टिक का सीमित उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज और पर्यावरण पर पड़ेगा। स्वयंसेवकों ने अपने संदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि पृथ्वी को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या किसी संस्था की नहीं, बल्कि हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतियोगिता में प्रस्तुत चित्रों ने उपस्थित सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया। इन चित्रों में एक ओर प्रकृति की सुंदरता को दर्शाया गया, तो दूसरी ओर मानवीय लापरवाही के कारण हो रहे विनाश को भी उजागर किया गया। यह विरोधाभास दर्शकों के मन में एक गंभीर सोच उत्पन्न करता है और उन्हें यह महसूस कराता है कि अब समय आ गया है जब हमें अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। प्रतिभागियों के प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया कि युवा वर्ग न केवल जागरूक है, बल्कि समाज को दिशा देने में भी सक्षम है।
निर्णायक मंडल द्वारा प्रतिभागियों का मूल्यांकन अत्यंत सूक्ष्मता और निष्पक्षता के साथ किया गया। प्रतियोगिता के समापन अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया, जिससे उनमें और अधिक उत्साह एवं प्रेरणा का संचार हुआ। साथ ही सभी प्रतिभागियों को उनके रचनात्मक योगदान के लिए सराहा गया और उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
इस पूरे आयोजन में डीकेश साहू, मोहनेश कंवर, इंद्र गुप्ता, सानिया लहरें, रिद्धि टंडन, आंचल खांडेकर, स्वाति तंवर ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब युवा शक्ति किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होती है, तो वह समाज में एक बड़ा परिवर्तन ला सकती है। एनएसएस इकाई द्वारा लिया गया यह पहल न केवल एक कार्यक्रम था, बल्कि एक सशक्त संदेश था कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता और सामूहिक प्रयास ही सबसे बड़ा समाधान है। इस अवसर पर यह संकल्प भी लिया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियाँ निरंतर आयोजित की जाती रहेंगी, ताकि पर्यावरण संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।
अंततः यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का एक उत्कृष्ट मंच बना और समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश छोड़ गया कि पृथ्वी की सुरक्षा ही मानवता की सुरक्षा है। यदि हम आज जागरूक होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, तो निश्चित ही हम आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी प्रदान कर सकते हैं।



