/कलेक्टर अवनीश शरण ने कोनी में सिम्स की विस्तारित निर्माणाधीन मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल भवन का निरीक्षण किया। उन्होंने बचे हुए उपकरणों की आपूर्ति और कर्मचारियों की भरती प्रक्रिया जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि लगभग 200 करोड रुपए की लागत से इस मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। इसमें मरीजों के लिए 240 बेड सुविधा हैं।


कलेक्टर ने पूरे परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया। मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भरती भी जल्द करने कहा है। उन्होंने उपकरण खरीदी वाली एजेंसी को शेष उपकरणों की आपूर्ति जल्द करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकार की वित्तीय सहयोग से इसका निर्माण किया जा रहा है। भवन में ग्राउंड फ्लोर के अलावा 10 मंजिल बनाए गए हैं। उपकरणों की खरीदी केंद्र सरकार की एजेंसी हाइट के माध्यम से की जा रही है।

इनमें 80 प्रकार के उपकरणों की आपूर्ति की जा चुकी है एवं 19 प्रकार के उपरकरण अस्पताल में स्थापित कर लिए गए है। केंद्र सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा इसका निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर सिम्स के अस्पताल अधीक्षक डॉ. नायक, सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।