दरअसल, पायलट उड़ान में देरी होने की अनाउंसमेंट कर रहा था। जिससे यात्री को इतना गुस्सा आ गया और उसने पायलट को थप्पड़ जड़ दिया। यात्री का दावा था कि वह फ्लाइट को पकड़ने के लिए वह बीते 13 घंटे से इंतजार कर रहा है। कोहरे और ट्रैफिक के बीच वह किसी तरह एयरपोर्ट पहुंचा। घंटों के इंतजार के बाद यात्रियों को विमान में बैठाया गया। बावजूद इसके उन्हें उड़ान में और देरी होने की बात कही जा रही है।
इंडिगो की एक फ्लाइट का एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। दरअसल, फ्लाइट में एक यात्री ने पायलट को ही थप्पड़ जड़ दिया। मामला रविवार देर रात का है। जब एक यात्री ने उड़ान में देरी होने पर पायलट पर हमला बोल दिया।
चलाना है चला वरना गेट खोल : सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो महज 27 सेकंड की है। यह वीडियो दिल्ली एयरपोर्ट की बताई जा रही है। वीडियो में विमान के अंदर पायलट उड़ान में देरी होने की अनाउंसमेंट करता दिख रहा है। वीडियो बनाने वाला पिछली सीट पर बैठा है, वीडियो में पायलट की बात सुनते कुछ यात्री भी दिखाई पड़ रहे हैं। इसी बीच उड़ान में और देरी होने की बात सुनकर एक यात्री इतना आग बबूला हो जाता है कि वह भागता हुआ आया और उसने पायलट के थप्पड़ जड़ दिया। युवक वीडियो में यह बोलता हुआ सुनाई पड़ रहा है कि ‘चलाना है तो चला, ‘वरना गेट खोल..
क्रू मेंबर में चीख पुकार : हमला करने वाला युवक पीले रंग की स्वैट शर्ट पहने था। उसका चेहरा नहीं दिख रहा है। हमले के बाद मौके पर मौजूद एयर होस्टेस में चीख पुकार मच गई। उन्होंने युवक को रोकने का प्रयास किया। घटना के बाद पायलट किसी तरह खुद को बचाकर कॉकपिट में भाग गया। वीडियो में एयर होस्टेस यह कहती हुई सुनाई पड़ रही हैं कि आप ऐसा कैसा कर सकते हैं

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।