UGC ने 11 अप्रैल 2023 (UGC वेबसाइट पर उपलब्ध पर आधिकारिक राजपत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग छात्रों की शिकायतों का निवारण विनियम, 2023 को अधिसूचित किया है.

5 दिसंबर 2023 के पिछले संचार में, विश्वविद्यालयों को फिर से लोकपाल नियुक्त करने और 31 दिसंबर 2023 तक यूजीसी विनियमों के अन्य प्रावधानों को लागू करने का अनुरोध किया गया था. यह भी उल्लेख किया गया था कि इन आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं करने वाले विश्वविद्यालयों की सूची यूजीसी वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी.

तदनुसार, विश्वविद्यालयों की सूची जो अभी तक लोकपाल नियुक्त करने के लिए हैं, वे संलग्न हैं.

जिन विश्वविद्यालयों ने लोकपाल नियुक्त या नियुक्त किया है, वे बाद में निम्नलिखित ईमेलों के लिए लोकपाल के पूर्ण विवरण का संचार कर सकते हैं:

विश्वविद्यालय जो पहले से ही लोकपाल नियुक्त कर चुके हैं, लेकिन सूची में अपना नाम पाते हैं, वे उपरोक्त ईमेल भी लिख सकते हैं

विश्वविद्यालयों और उनके संबद्ध कॉलेजों से अनुरोध है कि वे अपनी वेबसाइट पर और अपनी वेबसाइट पर प्रमुख स्थानों पर लोकपाल (छात्रों) और छात्रों की शिकायत निवारण समिति (SGRC) के विवरण और संपर्क विवरण प्रदर्शित करें परिसरों.

इसी तरह, हितधारक और आम जनता उपरोक्त ईमेल को लिख सकते हैं यदि किसी विश्वविद्यालय / कॉलेज में लोकपाल / एसजीआरसी नहीं है या उनका विवरण सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है. लेकिन जब यह व्यवस्था नहीं हुई तो यूजीसी के द्वारा बिलासपुर स्थित अटल यूनिवर्सिटी सहित छत्तीसगढ़ के 11 विश्वविद्यालय को डिफाल्टर की लिस्ट में डाल दिया गया तो वहीं पूरे देश भर में 432 विश्वविद्यालय को डिफाल्टर के लिस्ट में डाला गया है जिससे अब इनके ग्रांट पर तो असर पड़ेगा ही साथ ही यहां से शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों के डिग्री पर भी खतरा मंडराने लगा है हालांकि यूजीसी ने इन सभी विश्वविद्यालय को 31 जनवरी तक लोकपाल की नियुक्ति करने के निर्देश जारी किए हैं जिसके बाद उनके डिफाल्टर होने की लिस्ट में विचार किए जाने की बात भी कही गई है

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अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली के कैंसर की जटिल सर्जरी ‘इसोफैजेक्टॉमी’ सफलतापूर्वक संपन्न

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में अन्ननली (फूड पाइप) के कैंसर से पीड़ित मरीज की अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया इसोफैजेक्टॉमी (Esophagectomy) सफ tcलतापूर्वक की गई। इस जटिल ऑपरेशन का सफल नेतृत्व डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने किया।
इसोफैजेक्टॉमी को ऑन्को सर्जरी की सबसे कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण शल्यक्रियाओं में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में कैंसरग्रस्त अन्ननली के हिस्से को निकालकर पेट (स्टमक) की सहायता से भोजन के लिए नया मार्ग बनाया जाता है। यह ऑपरेशन अत्यधिक विशेषज्ञता, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, आधुनिक आईसीयू सुविधाओं तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में इस जटिल सर्जरी की सफलता प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब छत्तीसगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को ऐसी उन्नत कैंसर सर्जरी के लिए महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
इस अवसर पर डॉ. अमोल पडेगांवकर ने कहा कि अन्ननली के कैंसर का समय पर पता चलना उपचार की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक निगलने में कठिनाई, बिना कारण वजन कम होना, भोजन करते समय रुकावट महसूस होना अथवा लगातार उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने पर उपचार के परिणाम कहीं अधिक बेहतर होते हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता के लिए डॉ. अमोल पडेगांवकर एवं उनकी संपूर्ण सर्जिकल, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग तथा सहयोगी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर उन्नत कैंसर उपचार की आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफल शल्यक्रिया न केवल अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर की चिकित्सा विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब मध्य भारत में अत्याधुनिक एवं जटिल कैंसर सर्जरी विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक की जा रही हैं।